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मप्र की पहली मेट्रो ट्रेन का हुआ ट्रायल रन
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भोपाल। मध्यप्रदेश के लोक परिवहन सेवा के इतिहास में इंदौर से एक नया स्वर्णिम अध्याय जुड़ गया है। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने शनिवार देर शाम इंदौर में प्रदेश की पहली मेट्रो ट्रेन के ट्रायल रन का फ्लैग ऑफ किया। मुख्यमंत्री ने फ्लैग ऑफ के पश्चात मेट्रो की सवारी की। उन्होंने मेट्रो ट्रेन में बैठकर व्यवस्थाओं और सुविधाओं का जायजा लिया। इस अवसर पर अनेक जनप्रतिनिधि और वरिष्ठ अधिकारीगण तथा शहर के अन्य गणमान्य नागरिक भी उनके साथ थे।

ऐसी होगी मेट्रो ट्रेन

 

मेट्रो के कोच वातानुकूलित रहेंगे। दिव्यांग व्यक्तियों के लिये भी उचित स्थान रहेगा। मेट्रो ट्रेन के प्रत्येक कोच में 50 लोगों के बैठने और 300 लोगों के खड़े होने का स्थान रहेगा। लगभग 31 किलोमीटर से अधिक क्षेत्र में यह मेट्रो सेवा उपलब्ध रहेगी। इसमें 28 स्टेशन होंगे। जिसमें से 7 भूमिगत और 21 एलिवेटेड स्टेशन रहेंगे। नेशनल कॉमन मोबिलिटी कार्ड पर स्वचालित टिकटिंग की व्यवस्था होगी। दरवाजे भी स्वचालित रहेंगे। यात्री सूचना प्रदर्शन प्रणाली रहेगी। ग्रेब हेण्डल की लिफ्ट, एस्केलेटर, कस्टमर केयर सेंटर, हिंदी इंग्लिश में अनाउंसमेंट, दिव्यांगों के लिए व्हीलचेयर, अन्य सार्वजनिक सुविधाएं आदि रहेगी। ट्रेन में आपातकालीन संपर्क एवं आपातकालीन द्वार की व्यवस्था भी होगी। बिजली की खपत को कम करने के लिए स्टेशन और डिपो पर सौर ऊर्जा की व्यवस्था की जा रही है। इस ट्रेन का संचालन मध्य प्रदेश मेट्रो रेल कॉरपोरेशन लिमिटेड द्वारा किया जाएगा।

रिकॉर्ड समय में पूरा हुआ इंदौर मेट्रो निर्माण

- 6.3 किमी लम्बे मेट्रो वायडक्ट का निर्माण मात्र 484 दिनों पूरा किया गया, जिसमें 2 मानसून सीजन भी शामिल हैं। पटरी बिछाने का काम 4 माह में पूरा हुआ। तीन ट्रैक टर्नआउट्स का निर्माण मात्र 27दिनों में पूरा हुआ है, जो देश में एक रिकॉर्ड है। आठ दिनों में ट्रैक के तीन टर्नआउट्स का विद्युतीकरण किया गया। डिज़ाइन के बाद केवल 5 महीनों में मेट्रो रेल कोच का निर्माण पूरा । मात्र 45 दिनों में ट्रैक्शन थर्ड रेल प्रणाली का सम्पूर्ण कार्य पूर्ण किया गया। 23 दिनों में 4 एस्केलेटर लगाये गये।

इंदौर मेट्रो परियोजना के विषय में

 

येलो रिंग लाइन से जुड़ेंगे- गांधी नगर, भंवर सला चौराहा, विजय नगर चौराहा, खजराना चौराहा, बंगाली चौराहा, रेलवे स्टेशन, राजवाड़ा, बड़ा गणपति, एअरपोर्ट और गाँधी नगर। पहले चरण में- गांधी नगर से सुपर कॉरिडोर- 3 स्टेशनों के बीच 6.3 किमी लंबे रूट पर ट्रेनों का परीक्षण परिचालन प्रारंभ हो रहा है। जून 2024 से इंदौर और भोपाल वासियों को इन दो ट्रैक पर मिलने लगेगी मेट्रो सुविधा। दिसंबर 2026 तक दोनों शहरों की मेट्रो परियोजनाओं का सम्पूर्ण कार्य पूर्ण कर लिया जाएगा।

मेट्रो होगी सुखद सवारी

इंदौर में तीन कोच की 25 ट्रेन तथा भोपाल में भी तीन कोच की 27 ट्रेन चलाई जाएगी। एक कोच में लगभग 300 यात्रियों के लिए बैठने व खड़े होने का स्थान होगा। एक ट्रेन में एक बार में लगभग 900 यात्री आवागमन कर सकेंगे। दो ट्रेन के बीच का अंतराल 5 मिनट का होगा लेकिन अधिक भीड़ वाली अवधि के दौरान इससे दो मिनट तक घटाया जा सकेगा। मेट्रो रेल अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस होगी। ट्रेन के सभी डिब्बे वातानुकूलित होंगे। यात्रियों की सूचना के लिए सार्वजनिक संबोधन प्रणाली तथा दृश्यात्मक संकेत होंगे जिससे यात्री सही गंतव्य पर उतर सकें। ट्रेन का संचालन विश्व स्तर की उच्चतम सिम्नलिंग प्रणाली से होगा जिससे सुरक्षा एवं समय की पाबंदी सुनिश्चित होगी।

 

इस सिगनलिंग म्नलिंग प्रणाली से भविष्य में बिना ड्राइवर की ट्रेन भी चलाई जा सकेगी। थर्ड रेल प्रणाली से बिजली के तारों के जाल से शहर को मुक्ति। सभी ट्रेन्स मे उर्जा बचाने के लिये रिजनरेटिव ब्रेकिंग सिस्ट्म लगाया गया है जिससे ट्रेन्स में ब्रेकिंग के दौरान बिजली पैदा होगी।

 

वैकल्पिक उर्जा का अधिकतम उपयोग सुनिश्चित करने के लिये सौर उर्जा का इस्तेमाल होगा। ट्रेन एवं स्टेशन्स पर अत्याधुनिक अग्नि शमन प्रणाली लगाई गयी है। कोच में स्मार्ट लाइटिंग सिस्टम लगाया गया है। यात्रियों विशेषत:महिलाओं की सुरक्षा के लिये एआई बेस्ड सी सी टी वी की सुविधा, नेशनल कामन मोबिलिटी कार्ड पर आधारित स्वचालित टिकिटिग प्रणाली, स्टेशन्स पर लिफ्ट व एस्केलेटर इत्यादि उपकरण लगाए जाएंगे जिससे चढ़ना उतारना बिल्कुल ही आसान होगा।

 

दिव्यांग यात्रियों का विशेष ध्यान रखा गया है उनके लिए आवश्यक स्थानों पर ब्रेल लिपि और आवागमन के लिए स्पर्शनीय टाइल्स का उपयोग किया जा रहा है। सभी स्टेशन्स पर यात्रियों के सहूलियत के लिए शौचालय व पीने के पानी की सुविधा होगी। महिलाओं की सुरक्षा का विशेष ध्यान रखा गया है। मेट्रो मतलब सुरक्षित, सुगम, सुविधापूर्ण, सस्ती, सुंदर और सस्टेनेबल शहरी यातायात। ऑटोमेटिक परिचालन, सड़क दुर्घटना का कोई डर नहीं, बुजुर्गों एवं महिलाओं के लिए भी सुरक्षित।

 

सुगमता पूर्वक कमतर समय में गंतव्य तक पहुँच संभव, रोड कंजेशन, डायवर्सन एवं ट्रैफिक की समस्या से निजात। आरामदायक यात्रा, धक्कों एवं झटकों से मुक्ति, साफ एवं स्वच्छ परिवेश में सफर, ऑनलाइन टिकटिंग की सुविधा से टिकट के लिए लाइन भी नहीं लगना पड़ेगा। मेट्रो की यात्रा प्राइवेट टैक्सी, ऑटो, अपनी कार यहाँ तक की अपनी बाइक से भी सस्ती पड़ेगी। डेली कम्यूटर्स के लिए विशेष पास की व्यवस्था भी होगी।

 

मेट्रो से शहर की सुंदरता में भी चार चाँद लगेंगे। ये ट्रेन अपने आप मेन जितनी खूबसूरत है, उतने ही सुंदर स्टेंशंस भी बनेंगे। मेट्रो के एलिवेटेड ट्रैक के नीचे भी साज सज्जा और हरीतिमा की व्यवस्था बनाई जाएगी, जिससे शहर और भी सुंदर लगेगा।

 

मेट्रो का परिचालन तो प्रदूषण रहित होगा ही, लोग जब अपने कार-मोटरसाइकल इत्यादि त्यागकर मेट्रो से सफर करेंगे तो पेट्रोल-डीजल की खपत भी घटेगी। मेट्रो की कनेक्टिविटी मिल जाने के बाद अब शहर के आउटर एरिया मे कम किराये के आवासों, छात्रों के लिए वरदान यह वरदान साबित होगी। इंदौर और भोपाल एजुकेशन हब हैं। मेट्रो के आ जाने से इन शहरों में छात्रों के समय की भी बचत होगी, और पैसों की भी।

MadhyaBharat 1 October 2023

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