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ग्वालियर के डबरा में फर्जी दस्तावेज के जरिए बांग्लादेशी नागरिकों के हिंदू नाम से भारतीय पासपोर्ट जारी किए गए। मप्र एसटीएफ ने मामले में 70 फर्जी पासपोर्ट होंने की आशंका जताई है। 22 पासपोर्ट फर्जी होना पाया गया है। एक ही पते से कई पासपोर्ट बनाए गये हैं। पकड़े गए 2 आरोपी के पूर्वज भी बांग्लादेशी हैं। ये असम के रस्ते से डबरा पहुंचे थे। अब पुलिस वेरिफिकेशन की पूरी प्रक्रिया सवालों के घेरे में है। स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) की टीम पता लगाने में जुटी है कि जिन लोगों के नाम पर पुलिस वेरिफिकेशन हुआ, उनकी पहचान और पते का भौतिक सत्यापन किस आधार पर किया गया था। पुलिस स्तर से क्लियर रिपोर्ट जारी होने के बाद एसपी कार्यालय की पासपोर्ट सेल में दस्तावेजों की स्क्रूटनी किस तरह की गई। जांच के मुताबिक जिस अवधि में डबरा थाने से संदिग्ध पुलिस वेरिफिकेशन किए गए, उस दौरान विनायक शुक्ला थाना प्रभारी थे। वर्तमान में वे दतिया जिले में एसडीओपी बड़ौनी के पद पर पदस्थ हैं। उस समय डबरा थाने के बीट प्रभारी भूपेंद्र गुर्जर थे। बीट प्रभारी ने आवेदकों के पते और पहचान का भौतिक सत्यापन कर रिपोर्ट तैयार की थी। रिपोर्ट के आधार पर थाना स्तर से क्लियरेंस दी गई और रिपोर्ट एसपी कार्यालय भेजी गई। जांच में पता चला है कि फर्जी दस्तावेज पर पासपोर्ट के सहारे कुछ संदिग्ध भारत से बाहर गए थे। इसमें कुछ थाईलैंड पहुंच गए हैं। कुछ के बौद्ध भिक्षु के रूप में होने की जानकारी है। जांच के लिए सात राज्यों में एसटीएफ की टीमें भेजी गई हैं। फर्जी पाए जाने वाले पासपोर्ट रद्द कराने के लिए विदेश मंत्रालय को पत्र भेजा जाएगा। जो संदिग्ध अभी भारत में हैं, वे फर्जी दस्तावेजों से बने पासपोर्ट के जरिए विदेश न निकल सकें। विदेश भाग चुके संदिग्धों के खिलाफ रेड कार्नर नोटिस जारी कराने की प्रक्रिया की जा रही। पुलिस अधीक्षक राजेश सिंह भदौरिया के अनुसार तत्कालीन डबरा थाना प्रभारी, संबंधित बीट प्रभारी, एसपी कार्यालय की पासपोर्ट सेल से जुड़े अधिकारी और पासपोर्ट सेवा केंद्र के संबंधित अधिकारियों को नोटिस जारी कर उनके बयान दर्ज किए जाएंगे। लापरवाही सामने आने पर संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई होगी।
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