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सागर जिले के बंडा तहसील मुख्यालय से सटे आठ गांवों में जहरीली शराब पीने वाले लोगों की मौत का आंकड़ा बढ़ता जा रहा। मंगलवार को तीन और लोगों की मौत हो गई। यानी मरने वालों की संख्या बढ़कर 28 हो गई है। लेकिन सरकार की लापरवाही इस बीच देखने को मिली। प्रभावित क्षेत्रों में उन सात शराब की दुकानों को फिर से खोलने का आदेश जारी हो गया है, जिन्हें मौतों के बाद बंद करा दिया गया था। कलेक्टर प्रतिभा पाल की अध्यक्षता में आयोजित उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में राजस्व एवं ग्रामीण विकास अमले को क्षेत्र में सतर्कता बढ़ाने और जीरो टालरेंस की नीति पर काम करने के कड़े निर्देश जारी किए। बैठक में जिला पंचायत सीईओ जगदीश गोमे, अपर कलेक्टर अविनाश रावत, बंडा एसडीएम संजय जैन, जनपद सीईओ शिवानी कौरव सहित अन्य वरिष्ठ जिलाधिकारी, सचिव, जीआरएस एवं पटवारी शामिल हुए। अब डोर-टू-डोर सर्वे एवं घर-घर दस्तक दी जाएगी। गांव में घर-घर जाकर सर्वेक्षण करेगी। नशा छोड़ने की समझाइश दी जाएगी। शराब के सेवन से होने वाले दुष्प्रभावों को ध्यान में रखते हुए गांव-गांव में संदिग्ध लक्षणों वाले व्यक्तियों की हेल्थ स्क्रीनिंग होगी। अमानक या विषैली शराब के सेवन के लक्षण आमतौर पर 24 से 36 घंटे के भीतर सामने आने लगते हैं। ऐसे में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र तथा बुंदेलखंड मेडिकल कालेज को 24 घंटे अलर्ट मोड पर रखा गया है। अवैध या अमानक शराब पाई जाती है, तो उसे मौके पर ही जब्त कर पूरी तरह विनष्ट किया जाएगा।
विपक्ष ने मांगा इस्तीफा
मुख्य विपक्षी पार्टी कांग्रेस ने मामले में उप मुख्यमंत्री के इस्तीफे की मांग की है। कलेक्टर प्रतिभा पाल पर भी आरोप लग रहे। प्रतिभा पाल पहले रीवा में कलेक्टर थी। उप मुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल की खास मानी जा रहीं। ट्रांसफर के बाद प्रतिभा उनके प्रभार वाले जिले में आ गई है। रीवा में भी इनके लचर रवैये के चलते कॉलोनियों में खुले बारात घर और डीजे के साउंड से लोग परेशान थे।
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