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नई दिल्ली। 1963 में थुम्बा से पहले साउंडिंग रॉकेट के साथ शुरू हुई भारत की अंतरिक्ष यात्रा अब भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन के प्रस्ताव तक पहुंच गई है। इस सफर को नई पीढ़ी की तकनीकें गति दे रही हैं - पुन: प्रयोज्य प्रक्षेपण यान (RLV), इलेक्ट्रिक, ग्रीन और परमाणु प्रणोदन, इन-ऑर्बिट सर्विसिंग और स्वायत्त डॉकिंग।
ISRO ने SpaDeX मिशन के तहत कक्षा में दो उपग्रहों की स्वायत्त डॉकिंग कर दुनिया में चौथा देश बनने का गौरव हासिल किया। वहीं गगनयान मानव अंतरिक्ष उड़ान के लक्ष्य को आगे बढ़ा रहा है।
*नींव से वैश्विक पहचान तक*
1962 में डॉ. विक्रम साराभाई की पहल पर INCOSPAR और 15 अगस्त 1969 को ISRO की स्थापना हुई। शुरू से ISRO का लक्ष्य अंतरिक्ष तकनीक को आम नागरिक की सेवा, संचार, कृषि, मौसम पूर्वानुमान, आपदा प्रबंधन और सुरक्षा के लिए उपयोग करना रहा है।
*नेक्स्ट जनरेशन लॉन्च व्हीकल (NGLV)*
PSLV, GSLV, LVM3 और SSLV के बाद अब NGLV पर काम चल रहा है। सितंबर 2024 में कैबिनेट ने ₹8,240 करोड़ की लागत से NGLV को मंजूरी दी। यह LEO में 30 टन तक पेलोड ले जा सकेगा, जो LVM3 से तीन गुना ज्यादा है। इसका आंशिक रूप से पुन: प्रयोज्य 14 टन वाला संस्करण लॉन्च लागत को घटाएगा। यह भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन, चंद्र और ग्रहीय मिशनों के लिए अहम होगा।
*पुन: प्रयोज्य यान और स्क्रैमजेट*
ISRO ने पुष्पक RLV के तीन लैंडिंग प्रयोग 2023-2024 में सफल किए। 2016 में स्क्रैमजेट इंजन का मैक-6 पर सफल परीक्षण कर भारत यह तकनीक दिखाने वाला चौथा देश बना।
*स्वदेशी प्रणोदन*
ISRO 300 mN स्टेशनरी प्लाज्मा थ्रस्टर का 1000 घंटे का जीवन परीक्षण पूरा कर चुका है, जो पारंपरिक सिस्टम से 6 गुना ज्यादा दक्ष है। साथ ही ISROSENE नामक रॉकेट-ग्रेड केरोसिन और ग्रीन मोनोप्रोपेलेंट थ्रस्टर विकसित किए जा रहे हैं। बेलाट्रिक्स एयरोस्पेस ने 1N-क्लास ग्रीन थ्रस्टर का PSLV-C58 पर सफल प्रदर्शन किया है।
ISRO और परमाणु ऊर्जा विभाग भविष्य के चंद्र और मंगल मिशनों के लिए रेडियोआइसोटोप हीटर यूनिट (RHU) और थर्मोइलेक्ट्रिक जनरेटर (RTG) पर सहयोग कर रहे हैं।
*SpaDeX और मानव अंतरिक्ष उड़ान*
SpaDeX ने 16 जनवरी 2025 को डॉकिंग और फिर अनडॉकिंग, और 20 अप्रैल 2025 को 15 मीटर दूरी से पूर्ण स्वायत्त दूसरी डॉकिंग और बिजली हस्तांतरण का प्रदर्शन किया। यह तकनीक स्पेस स्टेशन और चंद्र नमूना वापसी मिशन के लिए जरूरी है।
*नेविगेशन, संचार और पृथ्वी अवलोकन*
NavIC भारत और 1500 किमी आसपास तक नेविगेशन सेवा दे रहा है। GSAT-24 (2022) DTH और GSAT-20 (2024) 48 Gbps थ्रूपुट के साथ ब्रॉडबैंड और इन-फ्लाइट कनेक्टिविटी दे रहा है। CMS-03/GSAT-7R (नवंबर 2025) नौसेना के लिए समर्पित है।
पृथ्वी अवलोकन में 2020-25 में 7 सहित 22 उपग्रह लॉन्च हुए। NASA-ISRO का NISAR मिशन 30 जुलाई 2025 को लॉन्च हुआ, जो L और S बैंड रडार से हर 12 दिन पृथ्वी का अवलोकन करेगा। HysIS हाइपरस्पेक्ट्रल इमेजिंग से कृषि, वानिकी और तटीय अध्ययन में मदद कर रहा है।
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