Since: 23-09-2009
नासिक, 31 अक्टूबर 2026। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु आज महाराष्ट्र के नासिक में सिंहस्थ महाकुंभ 2027 के ध्वज-स्तंभ पूजन, ध्वजा पूजन और ध्वजारोहण समारोह में शामिल हुईं। इस अवसर पर उन्होंने जनसभा को भी संबोधित किया।
राष्ट्रपति ने कहा कि नासिक-त्र्यम्बकेश्वर सिंहस्थ महाकुंभ की परंपरा जितनी प्राचीन है, उतनी ही समृद्ध भी है। हरिद्वार में गंगा तट पर, प्रयागराज में त्रिवेणी संगम पर, उज्जैन में शिप्रा तट पर और नासिक में गोदावरी तट पर आयोजित कुंभ समागम पूरी दुनिया में प्रसिद्ध हैं। सदियों से इनका निरंतर आयोजन भारत की ऐतिहासिक, सांस्कृतिक, सामाजिक और आध्यात्मिक परंपराओं की शक्ति का प्रमाण है।
उन्होंने कहा कि इन कुंभ मेलों में असंख्य श्रद्धालुओं का एकत्र होना भारत की सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक एकता और परंपराओं की निरंतरता का जीवंत प्रमाण है। ये मेले आस्था और सामाजिक समरसता के उदाहरण हैं।
राष्ट्रपति ने विश्वास जताया कि नासिक-त्र्यंबकेश्वर सिंहस्थ महाकुंभ 2027 हमारी प्राचीन विरासत को आधुनिक आयामों से जोड़ेगा और युवा पीढ़ी को भारत की महान विरासत और जीवन-मूल्यों से जोड़ने का उत्तम अवसर बनेगा।
उन्होंने कहा कि आज पूरी दुनिया प्रतिकूल मौसमी परिस्थितियों के कारण संकटों का सामना कर रही है। महाराष्ट्र सहित कई क्षेत्रों में सूखे से किसान प्रभावित हुए हैं। केंद्र और राज्य सरकारें किसानों सहित सभी देशवासियों की सहायता के लिए पूरी तरह प्रयासरत हैं।
स्वच्छता और पर्यावरण पर जोर देते हुए राष्ट्रपति ने सभी से पर्यावरण संरक्षण के लिए व्यक्तिगत और सामूहिक प्रयास करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि नासिक महाकुंभ में मेला प्रबंधन और जनभागीदारी से स्वच्छता और अपशिष्ट प्रबंधन के उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत किए जाएंगे।
MadhyaBharat
|
All Rights Reserved ©2026 MadhyaBharat News.
Created By:
Medha Innovation & Development |