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मध्यप्रदेश में करीब 50 लाख लोगों के आवासीय पट्टों की नि:शुल्क रजिस्ट्री कराने की तैयारी है। इसके लिए 17 सितंबर से 17 अक्टूबर तक विशेष अभियान चलाया जाएगा, जिसे तीन चरणों में पूरा किया जाना है। अभियान के दौरान पात्र हितग्राहियों को उनके पट्टों की रजिस्ट्री कराकर दस्तावेज की प्रति भी उपलब्ध कराई जाएगी। इससे अब तक बिना पंजीयन के पड़े आवासीय पट्टों को कानूनी तौर पर संपत्ति के रूप में दर्ज कराने का रास्ता साफ होगा और लोगों के मालिकाना हक को मजबूती मिलेगी।
अभियान को समय पर पूरा करने के लिए प्रदेशभर के राजस्व अमले को जिम्मेदारी सौंपी गई है। इसमें 3,771 तहसीलदार, नायब तहसीलदार और राजस्व निरीक्षक के साथ 16,444 पटवारी शामिल रहेंगे। कई हितग्राहियों को पहले आवासीय पट्टे आवंटित किए गए थे, लेकिन रजिस्ट्री नहीं होने के कारण इन जमीनों का इस्तेमाल संपत्ति के तौर पर करने में दिक्कत आ रही थी। बैंक से लोन लेने में भी परेशानी होती थी। रजिस्ट्री के बाद इन जमीनों को संपत्ति के रूप में मान्यता मिलेगी और पात्र लोगों के लिए बैंकिंग सुविधाओं का लाभ लेना आसान हो सकेगा।
सरकार ने एक महीने की तय अवधि में इस बड़े अभियान को पूरा करने के लिए राजस्व अधिकारियों को अतिरिक्त जिम्मेदारी भी दी है। तहसीलदार, नायब तहसीलदार और राजस्व निरीक्षकों को रजिस्ट्रार के अधिकार दिए गए हैं, ताकि रजिस्ट्री कार्यालयों पर निर्भरता कम हो और काम तेजी से पूरा किया जा सके। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए तैयारियों की समीक्षा की। समीक्षा के दौरान अभियान की निर्धारित तारीख को लेकर हुई जानकारी की गलती भी तुरंत स्पष्ट की गई और 17 सितंबर से ही अभियान शुरू करने की समय-सीमा पर जोर दिया गया। इस पहल से बड़ी संख्या में आवासीय पट्टाधारकों को उनकी जमीन से जुड़े दस्तावेज और संपत्ति अधिकार मजबूत करने का लाभ मिलने की उम्मीद है।
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