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ब्रिक्स शिखर सम्मेलन से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सदस्य देशों के बीच व्यापार और आर्थिक सहयोग को और मजबूत करने पर जोर दिया। ब्रिक्स बिजनेस फोरम में उन्होंने कहा कि समूह की अर्थव्यवस्थाएं पिछले वर्षों में दुनिया की औसत आर्थिक वृद्धि की तुलना में लगभग दोगुनी गति से आगे बढ़ी हैं। मौजूदा समय में ब्रिक्स देश दुनिया की करीब आधी आबादी, लगभग 40 फीसदी अर्थव्यवस्था और करीब 25 फीसदी वैश्विक व्यापार का प्रतिनिधित्व करते हैं। प्रधानमंत्री के मुताबिक, समूह के देशों का संयुक्त GDP गठन के शुरुआती दौर की तुलना में करीब साढ़े चार गुना बढ़ चुका है।
वैश्विक स्तर पर बढ़ते तनाव के बीच सुरक्षित समुद्री रास्तों को लेकर भी भारत ने अपना पक्ष रखा। प्रधानमंत्री ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय कारोबार को गति देने के लिए समुद्री मार्ग सुरक्षित रहना, सामान की निर्बाध आवाजाही और जहाजों पर काम करने वाले कर्मचारियों की सुरक्षा जरूरी है। व्यापार को बढ़ावा देने के लिए ब्रिक्स बिजनेस काउंसिल के सामने 10 प्रमुख व्यापारिक बाधाओं की पहचान कर उन्हें दूर करने का लक्ष्य रखा गया। इसके अलावा हर साल 100 नए स्टार्टअप्स को ब्रिक्स देशों के बाजारों में विस्तार का अवसर देने और कंपनियों के बीच 1,000 नई साझेदारियां विकसित करने का प्रस्ताव भी सामने रखा गया।
बैठक में रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान ने पश्चिमी देशों की आर्थिक पाबंदियों पर भी अपनी बात रखी। पुतिन ने दावा किया कि पिछले पांच वर्षों में वैश्विक अर्थव्यवस्था में ब्रिक्स देशों की हिस्सेदारी 40 फीसदी से अधिक रही है, जबकि जी-7 देशों की हिस्सेदारी घटकर करीब 29 फीसदी रह गई। ऐसे में भारत की अध्यक्षता में ब्रिक्स के एजेंडे में व्यापार, स्टार्टअप, निवेश और वैश्विक आर्थिक सहयोग को बढ़ाने पर खास फोकस दिखाई दे रहा है।
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