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महिला पहलवानों के यौन शोषण मामले में बृजभूषण शरण सिंह के खिलाफ सुनवाई 26 तक टली
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नई दिल्ली। दिल्ली के राऊज एवेन्यू कोर्ट ने महिला पहलवानों के यौन शोषण के आरोपों के संबंध में भारतीय कुश्ती संघ के पूर्व अध्यक्ष एवं भाजपा सांसद बृजभूषण शरण सिंह और विनोद तोमर के खिलाफ दायर मामले की सुनवाई टाल दी है। एडिशनल चीफ मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट हरजीत सिंह जसपाल के उपलब्ध नहीं होने की वजह से सुनवाई टली है। मामले की अगली सुनवाई 26 अगस्त को होगी।

 

11 अगस्त को सुनवाई के दौरान दिल्ली पुलिस ने कहा था कि महिला पहलवानों के यौन शोषण के आरोपों के संबंध में बृजभूषण सिंह और विनोद तोमर के खिलाफ यौन शोषण के पर्याप्त साक्ष्य हैं। दिल्ली पुलिस की ओर से वकील अतुल श्रीवास्तव ने कहा था कि गले लगाना यौन शोषण के दायरे में नहीं आता है, लेकिन यह सिर्फ गले लगानेभर का मामला नहीं है, मंशा के ऊपर निर्भर करता है, इसको साबित करने का दबाव आरोपित पर होता है। उन्होंने कहा था कि एक शिकायतकर्ता ने कहा है कि मंगोलिया में जब ओलंपिक क्वालिफिकेशन के लिए गए तो वहां पर डिनर के समय बृजभूषण सबसे अलग एक टेबल पर बैठे। वहां पर शिकायतकर्ता को बुलाया गया और बृजभूषण ने उसकी छाती तो छुआ और अपना हाथ उसके पेट तक ले गए उसके बाद दोबारा उसकी छाती को छुआ। क्या यह यौन शोषण के दायरे में नहीं आता है। अतुल श्रीवास्तव ने कहा था कि जो घटना देश के बाहर हुई है उसकी भी एफआईआर कनाट प्लेस थाने में दर्ज हुई है, ऐसे में इसी कोर्ट का क्षेत्राधिकार बनता है।

 

नौ अगस्त को बृजभूषण शरण सिंह की ओर से वकील राजीव मोहन ने दलील देते हुए कहा था कि 6 लोगों के द्वारा लगाए गए आरोपों के आधार पर चार्जशीट दाखिल की गई। कानून के मुताबिक बृजभूषण सिंह पर लगाए गए सभी आरोपों पर अलग-अलग जांच और चार्जशीट भी अलग-अलग दाखिल की जानी चाहिए थी जबकि एक मामले में सभी 6 शिकायतकर्ताओं की शिकायतों के आधार पर एक ही चार्जशीट दाखिल कर दी गई। बृजभूषण के वकील ने कहा था कि चार्ज फ्रेम करने के चरण में आरोपित को सुना जा सकता है। पहली शिकायतकर्ता द्वारा बृजभूषण के ऊपर जो आरोप लगाया गया है, उनमें से दिल्ली, बरेली और लखनऊ की तीन घटना ही भारत में हुई जो कोर्ट के क्षेत्राधिकार में आते हैं। बाकी देश के बाहर हुई है। ऐसे में विदेश की घटनाओं को लेकर जो आरोप लगाया है वह कोर्ट के क्षेत्राधिकार में तब तक नहीं आएगा जब तक अनुमति नहीं ली जाती है। बृजभूषण की ओर से कहा गया कि मंगोलिया, जकार्ता में हुई घटना का ट्रायल भारत में नहीं चल सकता, क्योंकि आपराधिक प्रक्रिया संहिता के तहत जहां पर घटना हुई है ट्रायल भी वहीं होना चाहिए।

मामले में पहली शिकायतकर्ता ने बृजभूषण सिंह पर कर्नाटक के बेल्लारी में शोषण का आरोप लगाया है। लखनऊ और दिल्ली में अशोका रोड और सिरीफोर्ट ऑडिटोरियम में शोषण की घटना का आरोप लगाया है। उसका ट्रायल भी दिल्ली में नहीं किया जा सकता है। बृजभूषण के वकील ने कहा कि शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि बृजभूषण ने उसको 20-25 सेकेंड के लिए कस कर गले लगाने, 21 अशोका रोड में उसको टच करने और सिरीफोर्ट में गले लगाया है। कुश्ती में अमूमन मेल कोच ही होते हैं और जब कोई बड़ा इवेंट होता है तो वहां पर अक्सर देखने को मिलता है कि कोच खिलाड़ियों को लगे लगा लेते हैं। इसको गलत कहना सही नहीं है।

उन्होंने कहा था कि शिकायतकर्ताओं ने बृजभूषण सिंह के खिलाफ 2017 और 2018 के आरोपों पर 2023 में शिकायत दर्ज करायी। हालांकि शिकायत में देरी को लेकर कोई भी ठोस वजह देने की वजह बिना बताए कहा गया कि वह अपने कैरियर को लेकर दबाव में थी। इसलिए शिकायत नहीं दर्ज करा सकीं। उन्होंने कहा था कि अभी हम चार्ज फ्रेम करने के स्टेज पर हैं लेकिन चार्ज फ्रेम करने को लेकर जो कानूनी बाधाएं हैं, उनको हल किए बिना आरोप तय नहीं किया जा सकता है।

कोर्ट ने 20 जुलाई को बृजभूषण सिंह और सह आरोपित विनोद तोमर को जमानत दी थी। जमानत देते हुए कोर्ट ने कहा कि बिना कोर्ट की अनुमति के वे विदेश नहीं जा सकते हैं। 15 जून को दिल्ली पुलिस ने राऊज एवेन्यू कोर्ट में चार्जशीट दाखिल की थी। चार्जशीट में भारतीय दंड संहिता की धारा 354, 354डी, 354ए और 506 (1) के तहत आरोप लगाए गए हैं। दिल्ली पुलिस ने राऊज एवेन्यू कोर्ट में बृजभूषण सिंह के खिलाफ छह बालिग महिला पहलवानों द्वारा लगाए गए यौन उत्पीड़न के मामले में चार्जशीट दाखिल किया है। राऊज एवेन्यू कोर्ट में दाखिल चार्जशीट में दो लोगों को आरोपित बनाया गया है। बृजभूषण सिंह के अलावा दूसरे आरोपित हैं भारतीय कुश्ती संघ के पूर्व असिस्टेंट सेक्रेटरी विनोद तोमर।

महिला पहलवानों ने बृजभूषण सिंह के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग करते हुए सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था। उसके बाद दिल्ली पुलिस ने एफआईआर दर्ज की थी। महिला पहलवानों ने बृजभूषण पर कार्रवाई की मांग करते हुए जंतर-मंतर पर धरना भी दिया था। इस धरने ने राजनीतिक रंग ले लिया था।

MadhyaBharat 19 August 2023

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