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भोपाल।वेल्लोर इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (VIT) भोपाल विश्वविद्यालय के नाम और लोकेशन को लेकर उठे विवाद पर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने सख्त रुख अपनाया है। आयोग ने मध्यप्रदेश शासन के उच्च शिक्षा विभाग के प्रमुख सचिव और UGC अध्यक्ष को फटकार लगाते हुए चार सप्ताह में अतिरिक्त रिपोर्ट और एक्शन टेकन रिपोर्ट (ATR) पेश करने को कहा है। इसकी अंतिम तिथि 29 नवंबर 2026 तय की गई है।
NSUI प्रदेश उपाध्यक्ष रवि परमार की शिकायत पर आयोग ने 22 अक्टूबर को सुनवाई की। शिकायत में आरोप था कि VIT भोपाल नाम में ‘भोपाल’ शब्द से छात्रों और अभिभावकों में भ्रम बनता है, जबकि इसका मुख्य कैंपस सीहोर जिले के कोठरी कलां में भोपाल-इंदौर हाईवे पर है। नाम और वास्तविक लोकेशन में करीब 100 किमी का अंतर है, जिससे एडमिशन लेने वाले छात्रों को ठगे जाने का एहसास होता है।
राज्य सरकार की रिपोर्ट पर NHRC ने उठाए सवाल
NHRC ने कहा कि राज्य सरकार ने अपनी रिपोर्ट में यह नहीं बताया कि क्या लोकेशन को लेकर छात्रों में गलत धारणा बनती है। सरकार ने सिर्फ यह कहा कि विश्वविद्यालय का नाम विधानसभा द्वारा मप्र निजी विश्वविद्यालय अधिनियम 2007 के तहत तय किया गया है। आयोग ने पूछा कि विश्वविद्यालय अपने प्रॉस्पेक्टस, वेबसाइट और विज्ञापनों में लोकेशन का जिक्र कैसे करता है, इसकी जांच क्यों नहीं की गई।
शिकायत में कैंपस में कथित अवैध क्लिनिक और अशांति की घटनाओं का भी जिक्र था। आयोग ने कहा कि राज्य सरकार की रिपोर्ट में इन आरोपों की जांच का कोई उल्लेख नहीं है।
राजपत्र की तारीखों में विसंगति पर भी आयोग ने स्पष्टीकरण मांगा। विभागीय पत्र में 24 अगस्त 2017 की अधिसूचना का जिक्र था, जबकि संलग्न दस्तावेज 13 जून 2017 का असाधारण राजपत्र था। सरकार को दोनों दस्तावेजों का संबंध स्पष्ट करने को कहा गया है।
UGC को भी नोटिस
आयोग ने कहा कि 30 मार्च और 5 जून 2026 को निर्देश के बाद भी UGC ने जवाब नहीं दिया। विश्वविद्यालयों के विज्ञापनों के विनियमन में UGC की भूमिका अहम है, इसलिए उसे भी भ्रामक नामकरण पर की गई कार्रवाई की रिपोर्ट चार हफ्ते में देनी होगी।
NSUI ने मांग की है कि छात्रों को सही और भ्रामकता से मुक्त जानकारी दी जाए और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच हो।
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