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रायपुर। वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में लागू वस्तु एवं सेवा कर यानी जीएसटी देश के आर्थिक इतिहास का सबसे बड़ा कर सुधार है। जीएसटी ने देश की जटिल अप्रत्यक्ष कर प्रणाली को सरल, पारदर्शी और अधिक प्रभावी बनाया है, जिससे न केवल व्यापारियों और उद्यमियों को राहत मिली है, बल्कि भारतीय अर्थव्यवस्था को वैश्विक बाजार में अधिक प्रतिस्पर्धी बनाने की दिशा में भी महत्वपूर्ण प्रगति हुई है। वित्त मंत्री चौधरी आज दुर्ग जिले के अंजोरा स्थित पृथ्वी पैलेस में टैक्स बार एसोसिएशन द्वारा आयोजित छत्तीसगढ़ टैक्स टेक समिट 2026 को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर स्कूल शिक्षा मंत्री एवं दुर्ग विधायक गजेंद्र यादव तथा जीएसटी अपीलीय अधिकरण की प्रधान पीठ के अध्यक्ष संजय कुमार मिश्रा सहित प्रदेश के विभिन्न जिलों से आए कर विशेषज्ञ, अधिवक्ता और टैक्स प्रैक्टिशनर्स बड़ी संख्या में उपस्थित थे।
वित्त मंत्री ने कहा कि जीएसटी लागू होने से पहले देश में 17 प्रकार के अप्रत्यक्ष कर और 23 प्रकार के उपकर प्रचलित थे, अलग-अलग राज्यों में अलग-अलग कर व्यवस्थाओं के कारण व्यापारियों को अनेक प्रक्रियागत कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था। जीएसटी ने इन सभी करों को एकीकृत कर देश को एक साझा अप्रत्यक्ष कर व्यवस्था प्रदान की है, इससे कर अनुपालन की प्रक्रियाएं सरल हुई हैं, कर प्रणाली में पारदर्शिता बढ़ी है और कर चोरी पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित करने में सहायता मिली है। उन्होंने कहा कि जीएसटी सुधारों से व्यापारियों पर कर अनुपालन का बोझ कम हुआ है और कारोबार को सुगम बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण बदलाव हुए हैं, जिससे भारतीय उद्यमियों को अंतरराष्ट्रीय बाजार और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में प्रतिस्पर्धा करने के बेहतर अवसर प्राप्त हुए हैं और विकसित भारत के निर्माण के लिए आधुनिक, पारदर्शी और प्रतिस्पर्धी कर व्यवस्था आवश्यक है तथा जीएसटी इस दिशा में महत्वपूर्ण आधार प्रदान कर रहा है।
वित्त मंत्री ने कहा कि वर्तमान समय तकनीकी परिवर्तन और नवाचार का है और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस तेजी से विभिन्न क्षेत्रों की कार्यप्रणाली को प्रभावित कर रहा है। कर प्रशासन, लेखांकन, विधिक अनुसंधान, दस्तावेजों के विश्लेषण और कर अनुपालन जैसे क्षेत्रों में एआई आधारित तकनीकों का उपयोग नई संभावनाएं पैदा कर रहा है। टैक्स बार एसोसिएशन के सदस्य करदाताओं और शासन के बीच महत्वपूर्ण कड़ी के रूप में कार्य करते हैं, ऐसे में उन्हें बदलती तकनीकों और आधुनिक डिजिटल उपकरणों की जानकारी होना अत्यंत आवश्यक है। इसी उद्देश्य से इस समिट में टैक्स प्रैक्टिशनर्स को एआई टूल्स के उपयोग से परिचित कराने के लिए विशेष तकनीकी सत्र आयोजित किए गए, जिससे कर विशेषज्ञों को अपने कार्यों में दक्षता बढ़ाने और करदाताओं को बेहतर सेवाएं उपलब्ध कराने में सहायता मिलेगी।
कार्यक्रम के दौरान टैक्स बार काउंसिल के प्रतिनिधियों ने शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव के समक्ष विधि शिक्षा के पाठ्यक्रम में जीएसटी कानून को शामिल करने का सुझाव भी रखा। प्रतिनिधियों ने कहा कि वर्तमान आर्थिक परिवेश में जीएसटी का महत्व निरंतर बढ़ रहा है और विधि के विद्यार्थियों को अध्ययन के दौरान ही अप्रत्यक्ष कर प्रणाली और जीएसटी कानून की व्यावहारिक जानकारी मिलने से उन्हें भविष्य में बेहतर व्यावसायिक अवसर प्राप्त हो सकेंगे।
समिट को संबोधित करते हुए जीएसटी अपीलीय अधिकरण की प्रधान पीठ के अध्यक्ष संजय कुमार मिश्रा ने कहा कि किसी भी क्षेत्र में सफलता प्राप्त करने के लिए कर्म के साथ ज्ञान का होना आवश्यक है और श्रीमद्भगवद्गीता के संदेश का उल्लेख करते हुए कहा कि ज्ञान के साथ किया गया कर्म लक्ष्य प्राप्ति की दिशा में अधिक प्रभावी होता है। उन्होंने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आज के दौर में विभिन्न पेशेवर क्षेत्रों का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुका है और कर एवं विधिक क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञ भी इससे अछूते नहीं हैं, इसलिए बदलते समय के साथ नई तकनीकों को समझना और उनका समुचित उपयोग करना आवश्यक है।
छत्तीसगढ़ टैक्स टेक समिट 2026 का आयोजन टैक्स बार काउंसिल के अध्यक्ष विवेक सारस्वत एवं गोपाल कृष्ण तवनिया के नेतृत्व में किया गया। एसोसिएशन के महासचिव प्रभांक ठाकुर ने बताया कि संघ द्वारा अपने सदस्यों को कर कानूनों में होने वाले बदलावों, नवीन प्रावधानों और तकनीकी नवाचारों की अद्यतन जानकारी उपलब्ध कराने के उद्देश्य से प्रदेश के विभिन्न जिलों में समय-समय पर ऐसे आयोजन किए जाते हैं। समिट में जगदलपुर, अंबिकापुर, धमतरी, राजनांदगांव, रायपुर, जांजगीर-चांपा, बिलासपुर और दुर्ग सहित प्रदेश के विभिन्न जिलों से टैक्स बार एसोसिएशन के सदस्यों ने भाग लिया और जीएसटी कानून, कर अनुपालन, आधुनिक तकनीकों तथा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के व्यावहारिक उपयोग से जुड़े विभिन्न विषयों पर गहन विचार-विमर्श किया गया।
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