Since: 23-09-2009
रायपुर, 31 अक्टूबर 2026। छत्तीसगढ़ को देश के धान के कटोरे के रूप में जाना जाता है और यहां की अर्थव्यवस्था तथा ग्रामीण जीवन का सबसे मजबूत आधार कृषि और किसान हैं। प्रदेश के 40 लाख कृषक परिवारों और 82 प्रतिशत लघु एवं सीमांत किसानों की खुशहाली को विकास का मूल मानते हुए मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार ने बीते तीन वर्षों में कृषि क्षेत्र को नई दिशा देने के लिए अनेक साहसिक और किसान हितैषी निर्णय लिए हैं।
इन निर्णयों का व्यापक असर अब खेत से लेकर बाजार तक दिखाई दे रहा है। किसानों को उनकी उपज का बेहतर मूल्य दिलाना, आर्थिक सहायता उपलब्ध कराना, खेती को आधुनिक बनाना और पूरी कृषि व्यवस्था में पारदर्शिता लाना सरकार की प्राथमिकता रही है। बीते तीन वर्षों में लगभग 437 लाख मीट्रिक टन धान की खरीदी और किसानों को 1.40 लाख करोड़ रुपये से अधिक का भुगतान इसी प्रतिबद्धता का प्रमाण है।
*तीन वर्षों में धान खरीदी का रिकॉर्ड*
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में खरीफ विपणन वर्ष 2023-24 में लगभग 144.92 लाख मीट्रिक टन और वर्ष 2024-25 में लगभग 149.25 लाख मीट्रिक टन धान की खरीदी की गई, जो अपने आप में एक रिकॉर्ड है। वर्ष 2025-26 में भी लगभग 142 लाख मीट्रिक टन धान का उपार्जन हुआ। इस प्रकार तीन खरीफ सीजन में कुल लगभग 437 लाख मीट्रिक टन धान की खरीदी कर किसानों को लगभग 1.40 लाख करोड़ रुपये का भुगतान किया गया। यह व्यवस्था न केवल किसानों को उनकी मेहनत का सम्मानजनक मूल्य दे रही है, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था में नकदी प्रवाह बढ़ाकर बाजार और रोजगार को भी मजबूती प्रदान कर रही है।
*इस वर्ष 3100 रुपये प्रति क्विंटल की दर से खरीदी*
किसानों के हित में मंत्रिपरिषद ने खरीफ विपणन वर्ष 2026-27 में 15 नवंबर से धान खरीदी प्रारंभ करने का ऐतिहासिक निर्णय लिया है। इस वर्ष 27.50 लाख से अधिक किसानों से 3100 रुपये प्रति क्विंटल की दर से अधिकतम 21 क्विंटल प्रति एकड़ के मान से धान खरीदा जाएगा, जो देश में सबसे अधिक दरों में से एक है।
किसानों की सुविधा के लिए सरकार ने प्रक्रिया को बेहद सरल बनाया है। एग्रीस्टैक आईडी वाले पिछले वर्ष के पंजीकृत किसानों को पुनः पंजीयन से पूरी तरह छूट दी गई है। उन्हें धान विक्रय के लिए समिति में ऋण पुस्तिका लाने की भी आवश्यकता नहीं होगी। डिजिटल क्रॉप सर्वे से रकबे का ऑनलाइन निर्धारण और बायोमेट्रिक आधारित खरीदी से पूरी व्यवस्था में पारदर्शिता सुनिश्चित की जाएगी। किसानों को लंबी दूरी तय न करनी पड़े, इसके लिए इस वर्ष 360 नए उपार्जन केंद्र शुरू किए जा रहे हैं, जिसके बाद प्रदेश में कुल 3100 केंद्रों के माध्यम से धान खरीदी होगी।
*कृषक उन्नति योजना बनी संबल*
किसानों को आर्थिक संबल देने के लिए संचालित कृषक उन्नति योजना के तहत खरीफ 2023 से खरीफ 2025 तक लगभग 25.52 लाख किसानों को 35,904.90 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया है। धान के स्थान पर अन्य लाभकारी फसल जैसे दलहन, तिलहन लेने वाले किसानों को प्रोत्साहित करने के लिए सहायता राशि 11 हजार रुपये से बढ़ाकर 15 हजार रुपये प्रति एकड़ की गई है। वहीं प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि के अंतर्गत प्रदेश के किसानों को अब तक 12,267.39 करोड़ रुपये से अधिक की राशि प्रदान की जा चुकी है।
*आधुनिक खेती, सिंचाई और विविधीकरण पर विशेष जोर*
कृषि को आधुनिक और लाभकारी बनाने के लिए वर्ष 2024-25 से अब तक 8,567 कृषि यंत्र किसानों को उपलब्ध कराए गए हैं तथा 678 फार्म मशीनरी बैंक स्थापित किए गए हैं, ताकि छोटे किसान भी आधुनिक मशीनों का उपयोग कर सकें।
प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के तहत 46,615 हेक्टेयर क्षेत्र में ड्रिप एवं स्प्रिंकलर सिंचाई का विस्तार हुआ है और किसानों को 201.07 करोड़ रुपये से अधिक का अनुदान दिया गया है, जिससे पानी की बचत के साथ उत्पादन बढ़ रहा है। एग्रीस्टैक के माध्यम से 19,751 गांवों की जियो-रेफरेंसिंग पूरी की जा चुकी है और 43 लाख से अधिक किसानों का पंजीयन किया गया है, जो भविष्य में डिजिटल कृषि का आधार बनेगा।
दलहन एवं तिलहन उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए प्रधानमंत्री अन्नदाता आय संरक्षण अभियान के तहत 29 जिलों के 273 केंद्रों से अरहर, सोयाबीन, चना, मसूर और सरसों की खरीदी कर किसानों को 219.08 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया। राष्ट्रीय खाद्य तेल मिशन के अंतर्गत 94,615 हेक्टेयर क्षेत्र में विस्तार और 10 तेल निष्कर्षण इकाइयों की स्थापना भी प्रस्तावित है, जिससे प्रदेश खाद्य तेल में आत्मनिर्भर बनेगा।
*किसानों की सुरक्षा और मजबूत आधारशिला*
प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत खरीफ एवं रबी 2025-26 में 16.70 लाख से अधिक किसानों ने अपनी फसलों का बीमा कराया तथा 1 लाख 40 हजार 730 किसानों को 292.43 करोड़ रुपये का दावा भुगतान किया गया, जिससे प्राकृतिक आपदा में भी किसान सुरक्षित रहे।
उर्वरक की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए खरीफ 2026 में 15.55 लाख मीट्रिक टन के लक्ष्य के विरुद्ध 18.02 लाख मीट्रिक टन से अधिक उर्वरक का भंडारण किया गया है। कालाबाजारी और जमाखोरी के विरुद्ध सघन निरीक्षण एवं कठोर कार्रवाई भी की गई है।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय का स्पष्ट मानना है कि अन्नदाता की खुशहाली, खेती की समृद्धि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था की मजबूती ही विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण का असली आधार है और सरकार इसी दिशा में निरंतर कार्य कर रही है।
MadhyaBharat
|
All Rights Reserved ©2026 MadhyaBharat News.
Created By:
Medha Innovation & Development |