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भोपाल। मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष जीतू पटवारी ने बालाघाट में बच्चों की मौत पर सवाल खड़े किए हैं। दोनों नेताओं ने संबंधित अधिकारियों से चर्चा कर पूरे मामले की जानकारी ली। वहीं जनसभा को संबोधित करते हुए जीतू पटवारी ने आदिवासी बच्चों की मौत को लेकर प्रदेश सरकार पर गंभीर सवाल खड़े किए। पटवारी ने कहा कि “यदि स्वास्थ्य सेवाएं गांव तक पहुंच रही हैं तो बीमार बच्चे अस्पताल क्यों नहीं पहुंचे? अगर सरकार पहले से सतर्क थी, तो स्थिति गंभीर होने से पहले रोकथाम क्यों नहीं हुई? मुख्यमंत्री से सीधा सवाल है—आदिवासी बच्चे सरकार की प्राथमिकता में कहां हैं? उन्होंने कहा कि बालाघाट की घटना केवल एक जिले का मामला नहीं है, बल्कि यह मध्य प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था, कुपोषण और आदिवासी क्षेत्रों में सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन पर गंभीर सवाल खड़े करती है। उन्होंने कहा कि छोटे-छोटे बच्चों की मौत पर राजनीति नहीं, बल्कि जवाबदेही और न्याय की जरूरत है। पटवारी ने आरोप लगाया कि मध्य प्रदेश में सरकार की लापरवाही और भ्रष्टाचार का सबसे ज्यादा खामियाजा गरीब, आदिवासी परिवारों और बच्चों को भुगतना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि बालाघाट से लेकर श्योपुर, झाबुआ, अलीराजपुर, धार, मंडला और डिंडोरी तक आदिवासी अंचलों में कुपोषण, स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी और सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन को लेकर लगातार शिकायतें सामने आती रही हैं। पटवारी ने कहा कि शासन के आंकड़ों के अनुसार चार गांवों में 6,431 बच्चों की जांच में 1,049 बच्चे कुपोषित पाए गए। वहीं 1,21,892 बच्चों की पोषण जांच में 3,741 बच्चे अति-कुपोषित और 15,588 बच्चे सामान्य कुपोषित पाए गए। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि जिन बच्चों की मौत हुई है, उनके परिवारों को केवल सांत्वना नहीं, बल्कि न्याय और जवाब चाहिए। घटना के लिए जिम्मेदार अधिकारियों एवं दोषियों की जवाबदेही तय होनी चाहिए और यदि किसी स्तर पर लापरवाही हुई है तो उसके खिलाफ कठोर कार्रवाई की जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि सरकार को यह स्पष्ट करना चाहिए कि बच्चों को समय पर उपचार क्यों नहीं मिला, स्वास्थ्य विभाग की व्यवस्थाएं कहां विफल हुईं और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए क्या ठोस कदम उठाए जाएंगे।
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