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मध्य प्रदेश में छोटे और पहली बार अपराध करने वालों के लिए सजा का तरीका बदलने की दिशा में नई व्यवस्था लागू हो गई है। गृह विभाग ने ‘मप्र कम्युनिटी सर्विस गाइडलाइंस-2026’ को अधिसूचित कर दिया है। इसके तहत अदालत अपराध की प्रकृति और परिस्थितियों को देखते हुए दोषी को जेल भेजने की बजाय एक तय अवधि तक बिना वेतन सामुदायिक सेवा करने का आदेश दे सकती है। यह प्रावधान भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 की धारा 23(2) के तहत लागू होगा। गाइडलाइन 11 सितंबर 2026 को राजपत्र में प्रकाशित होने के साथ प्रभावी हो चुकी है।
इस व्यवस्था में पहली बार अपराध करने वालों को खास तौर पर ध्यान में रखा गया है। वहीं, आदतन अपराध करने वाले व्यक्ति को कम्युनिटी सर्विस की सजा देने पर अदालत को इसके कारण दर्ज करने होंगे। सजा तय करते समय दोषी की उम्र, शारीरिक क्षमता, शिक्षा, पेशा, कौशल और सामाजिक-आर्थिक स्थिति जैसे पहलुओं को भी ध्यान में रखा जा सकता है। काम भी व्यक्ति की क्षमता और कौशल के अनुसार तय किया जा सकेगा। उदाहरण के तौर पर डॉक्टर, इंजीनियर, अकाउंटेंट या वकील जैसे पेशेवरों को उनकी विशेषज्ञता के अनुरूप जरूरतमंद और वंचित लोगों के हित में सेवा का काम दिया जा सकता है।
गाइडलाइन में कम्युनिटी सर्विस के दौरान निगरानी और नियमों का पालन भी तय किया गया है। सरकारी अस्पताल में सफाई, ओपीडी या मरीजों की सुविधा से जुड़े सहयोग, स्कूल और लाइब्रेरी में काम, नगर निकायों की सफाई और पौधरोपण जैसे कार्य कराए जा सकते हैं। अगर दोषी बिना अनुमति अनुपस्थित रहता है, काम छोड़ देता है, अनुशासनहीनता करता है या अधिकारी के निर्देश नहीं मानता, तो इसे नियमों का उल्लंघन माना जाएगा। निगरानी अधिकारी इसकी रिपोर्ट अदालत को देंगे। अदालत जरूरत के अनुसार सेवा की अवधि बढ़ा सकती है, काम या स्थान बदल सकती है या बाकी सेवा को मूल आदेश में तय कारावास में बदला जा सकता है। आदेश में सेवा के कुल घंटे या दिन, समय-सीमा, स्थान, निगरानी अधिकारी और रिपोर्टिंग की पूरी व्यवस्था स्पष्ट रूप से दर्ज करना जरूरी होगा।
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