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अनुकंपा नियुक्ति पर हाईकोर्ट सख्त: जिम्मेदारी निभानी होगी, नहीं तो जाएगी नौकरी
Raipur ,  High Court , compassionate appointment: Responsibility,  fulfilled

Chhattisgarh High Court ने अनुकंपा नियुक्ति को लेकर महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा कि यह किसी व्यक्ति को दिया गया उपहार या विरासत नहीं, बल्कि पूरे परिवार को आर्थिक संकट से उबारने का माध्यम है। जस्टिस ए.के. प्रसाद की पीठ ने स्पष्ट किया कि इस प्रकार की नियुक्ति के साथ पारिवारिक जिम्मेदारियां भी जुड़ी होती हैं, जिन्हें नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

मामलाAmbikapur की रहने वाली एक बुजुर्ग महिला से जुड़ा है, जिनके पति और बेटे दोनों का निधन हो चुका है। बेटे की मौत के बाद बहू को अनुकंपा नियुक्ति दी गई थी, इस शर्त पर कि वह अपनी सास का भरण-पोषण करेगी। लेकिन आरोप है कि नौकरी मिलने के बाद बहू का व्यवहार बदल गया और उसने सास की देखभाल करने से इनकार कर दिया, जिससे बुजुर्ग महिला को आर्थिक और सामाजिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ा।

 

कोर्ट ने सुनवाई के दौरान कहा कि बहू अपने दायित्वों से मुंह नहीं मोड़ सकती। यदि वह सास की देखभाल नहीं करती है, तो उसकी नियुक्ति रद्द की जा सकती है। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि जिस कर्मचारी की जगह नौकरी मिली है, उसकी पारिवारिक जिम्मेदारियां भी उसी के साथ स्थानांतरित होती हैं। इस फैसले को अनुकंपा नियुक्ति से जुड़े मामलों में एक अहम मिसाल माना जा रहा है।

Priyanshi Chaturvedi 22 April 2026

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