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वंदे मातरम को लेकर शशि थरूर के सवाल, बोले- हर कार्यक्रम में पूरा राष्ट्रगीत गाना लोगों पर बोझ
Shashi Tharoor , Vande Mataram, singing , national anthem , burden , people

कांग्रेस सांसद Shashi Tharoor ने सरकारी कार्यक्रमों में राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम’ के सभी छह छंदों को अनिवार्य रूप से गाने या बजाने के नए नियमों पर सवाल उठाए हैं। तिरुवनंतपुरम में मीडिया से बातचीत के दौरान उन्होंने कहा कि वंदे मातरम देश का सम्मानित राष्ट्रगीत है और जब यह गाया जाता है तो लोग सम्मान में खड़े होते हैं, लेकिन इसका पूरा संस्करण हर कार्यक्रम की शुरुआत और अंत में गाना लोगों के लिए बोझिल हो सकता है। उन्होंने कहा कि अधिकांश लोगों को केवल पहला या दूसरा छंद ही याद है और परंपरागत रूप से इन्हीं का उपयोग सार्वजनिक आयोजनों में किया जाता रहा है।

थरूर ने फरवरी में उपराष्ट्रपति C. P. Radhakrishnan की मौजूदगी वाले एक कार्यक्रम का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां शुरुआत और समापन दोनों अवसरों पर वंदे मातरम का पूरा संस्करण बजाया गया था। उनके मुताबिक गीत लंबा होने के कारण लोगों को दो बार लंबे समय तक खड़ा रहना पड़ा, जिससे असुविधा हुई। उन्होंने स्पष्ट किया कि उन्हें राष्ट्रगीत से कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन इस विषय पर व्यावहारिक दृष्टिकोण अपनाने और आपसी सहमति से समाधान निकालने की जरूरत है।

 

दरअसल, केंद्र सरकार के नए दिशानिर्देशों के अनुसार सरकारी कार्यक्रमों, स्कूलों और अन्य औपचारिक आयोजनों में वंदे मातरम के सभी छह अंतरे गाए जाने की व्यवस्था की गई है, जिसकी कुल अवधि करीब 3 मिनट 10 सेकेंड है। अब तक अधिकांश आयोजनों में केवल पहले दो अंतरे ही गाए जाते थे। इस मुद्दे पर केरल सरकार और राज्यपाल Rajendra Vishwanath Arlekar के बीच भी अलग-अलग दृष्टिकोण सामने आए हैं। थरूर का कहना है कि राष्ट्रगीत का सम्मान बना रहना चाहिए, लेकिन इसके क्रियान्वयन को लेकर संतुलित और सर्वसम्मत रास्ता अपनाया जाना चाहिए।

Priyanshi Chaturvedi 2 June 2026

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