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भरत तिवारी एनकाउंटर पर अनिरुद्धाचार्य का बयान: “शरण में आए व्यक्ति को मारना पाप, जनता सरकार को पापी कहेगी”
Aniruddhacharya

भोजपुर के शाहपुर क्षेत्र में हुए भरत तिवारी एनकाउंटर को लेकर विवाद लगातार बढ़ता जा रहा है। इस मामले पर कथावाचक Aniruddhacharya ने बिहार सरकार और पुलिस प्रशासन की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए कहा कि किसी भी शासक के लिए जनता की हत्या सबसे बड़ा पाप माना जाता है। उन्होंने कहा कि यदि कोई व्यक्ति शरण में आ जाए या निर्दोष हो, तो उसके खिलाफ घातक कार्रवाई धर्म और न्याय दोनों के विरुद्ध है। उनके बयान के बाद यह मामला राजनीतिक और सामाजिक चर्चा का विषय बन गया है।

अनिरुद्धाचार्य ने कहा कि भरत तिवारी ने कथित तौर पर किसी आपराधिक उद्देश्य से हथियार नहीं उठाया था, बल्कि वह गंगा कटाव और बाढ़ से प्रभावित लोगों की समस्याओं को उठाने का प्रयास कर रहा था। उनके अनुसार, यदि कोई व्यक्ति समाज और अपने क्षेत्र के हित में आवाज उठाता है, तो उसकी बात सुनी जानी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में जनता की समस्याओं का समाधान संवाद और संवेदनशीलता से होना चाहिए, न कि बल प्रयोग से।

इस बीच मामले पर पुलिस प्रशासन ने भी प्रतिक्रिया दी है। Sudhanshu Kumar ने स्वीकार किया है कि घटनाक्रम को संभालने में कुछ स्तर पर चूक हुई थी और पूरे मामले की जांच की जा रही है। भरत तिवारी के परिवार का आरोप है कि वह गंगा कटाव से प्रभावित लोगों के अधिकारों के लिए संघर्ष कर रहे थे। वहीं प्रशासन का कहना है कि घटना से जुड़े सभी तथ्यों की जांच के बाद ही अंतिम निष्कर्ष सामने आएगा। मामला फिलहाल जांच के दायरे में है और विभिन्न पक्षों के बयान लगातार सामने आ रहे हैं।

 
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