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छत्तीसगढ़ के स्वतंत्रता सेनानियों के परिवार आज भी संघर्ष में
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छत्तीसगढ़ के 1,649 स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों ने देश की आजादी की लड़ाई में योगदान दिया, लेकिन अब प्रदेश में एक भी सेनानी जीवित नहीं है। आजादी के 79 साल बाद भी कई सेनानियों के परिवार सरकारी सुविधाओं और सम्मान के लिए संघर्ष कर रहे हैं। रायपुर के स्वतंत्रता सेनानी नागरदास बाबरिया के बेटे मुकेश 2017 से अपने पिता की मूर्ति लगाने की अनुमति के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर काट रहे हैं। उनका कहना है कि मूर्ति का खर्च वे खुद उठाने को तैयार हैं, लेकिन प्रशासन से अनुमति नहीं मिल पा रही। वहीं, दौलतराम साहू के परिवार का गुजारा ढाई एकड़ खेती और छोटी किराना दुकान से हो रहा है, जबकि पेंशन बंद होने के बाद परिवार को आर्थिक परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

दूसरी ओर, केजऊ कोटवार के परिवार के पास अब करीब दो एकड़ जमीन ही खेती का सहारा है, जबकि उनकी कुछ जमीन भारतमाला परियोजना में चली गई। पाटन के स्वतंत्रता संग्राम सेनानी शिवदयाल चंद्राकर का परिवार भी आर्थिक तंगी में जीवन बिता रहा है और पान ठेले से गुजर-बसर कर रहा है। बिलासपुर के कालीचरण तिवारी के परिवार का कहना है कि सेनानी परिवारों को इलाज और शिक्षा में अपेक्षित सुविधाएं नहीं मिल रही हैं। वहीं, पं. रामगोपाल तिवारी के परिवार ने बताया कि उन्होंने सेनानी के नाम पर मिलने वाली सरकारी सुविधाओं का लाभ नहीं लिया। परिजनों का कहना है कि स्वतंत्रता दिवस जैसे राष्ट्रीय पर्व पर सम्मान और याद किए जाने के साथ सरकार को सेनानी परिवारों की मौजूदा समस्याओं पर भी ध्यान देना चाहिए।

Priyanshi Chaturvedi 15 August 2026

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