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नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने शराब कांड को सरकार की जहर बांटो योजना बताया
नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार


भोपाल। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने सागर में जहरीली शराब से हुई मौतों और मध्यप्रदेश में अवैध शराब के नेटवर्क को लेकर सरकार पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने इसे सरकार की जहर बांटो योजना बताया है। सिंघार ने कहा कि सागर में जहरीली और अवैध शराब से 15 लोगों की मौत हुई है, जबकि 110 से अधिक लोग अस्पताल में जिंदगी के लिए संघर्ष कर रहे हैं। इससे पहले 6 सितंबर को उमंग सिंघार ने प्रभावित गांवों का दौरा कर मृतकों के परिजनों से मुलाकात की। उन्होंने बताया कि कई परिवारों ने अपने युवा बेटे, पिता या परिवार के एकमात्र कमाने वाले सदस्य को खोया है। उन्होंने कहा कि सरकार को यह स्पष्ट करना चाहिए कि इन मौतों की जिम्मेदारी किसकी है।
जहरीली शराब में मेथेनॉल का इस्तेमाल
सिंघार ने कहा शराब में  मेथेनॉल मिली। यह मानव सेवन के लिए नहीं है। यह एक अत्यंत जहरीला औद्योगिक रसायन है, जिसका इस्तेमाल सॉल्वेंट, ईंधन और औद्योगिक प्रक्रियाओं में होता है। सिंघार ने कहा कि जांच केवल शराब बेचने वाले तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि यह पता लगाया जाना चाहिए कि जहर किसने मिलाया और यह कहां से आया।
यूपी कनेक्शन और प्रशासन की मिली भगत
सिंघार ने कहा Sagar Gold की बोतल पर DCR Distillery Pvt. Ltd., ग्राम महोर, जिला सागर का पता दर्ज है। पुलिस के अनुसार शराब ललितपुर, उत्तर प्रदेश से आई थी। इसके अलावा ‘Bambaiya Whisky’ का नाम भी सामने आया है। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि शराब उत्तर प्रदेश से मध्यप्रदेश पहुंची, तो सीमा पार करते समय मध्यप्रदेश पुलिस और आबकारी विभाग क्या कर रहे थे। ये सिर्फ मध्यप्रदेश के अधिकारियों को बचाने के लिए किया जा रहा है जबकि दोनों शराब मध्यप्रदेश में ही बन रही है। उन्होंने कहा कि दोनों राज्यों में भाजपा की सरकार है, इसलिए इस पूरे नेटवर्क की जिम्मेदारी और संरक्षण की जांच होनी चाहिए।
भाजपा नेताओं के परिवारों से जुड़े आरोप
कॉरपोरेट रिकॉर्ड के अनुसार DCR Distillery Pvt. Ltd. के निदेशक के रूप में गजेंद्र सिंह राठौर (DIN: 01325291) का नाम दर्ज है। परिवार के अन्य सदस्य भी निदेशक हैं। गजेंद्र सिंह राठौर, पूर्व मंत्री और भाजपा नेता स्वर्गीय हरनाम सिंह राठौर के भाई हैं। स्थानीय लोगों ने पूर्व मंत्री भूपेंद्र सिंह के लोगों के अवैध शराब कारोबार में शामिल होने की बात भी कही है। सिंघार ने इन आरोपों की जांच की मांग की।
नकली शराब का री-पैकेजिंग नेटवर्क
नकली शराब को ब्रांडेड बोतलों में भरकर बेचने का नेटवर्क सक्रिय होने का आरोप है। जहां सरकारी दुकान पर बोतल ₹140 में बिकती है, वहीं नकली शराब ₹40–50 में उपलब्ध होने से इसका अवैध बाजार बढ़ा। आबकारी ठेकेदारों द्वारा पहले ही शराब माफिया के सक्रिय होने की शिकायत की गई थी, लेकिन समय पर कार्रवाई नहीं हुई। सिंघार ने जांच को केवल एक ब्रांड तक सीमित रखने के बजाय बॉटलिंग, लेबलिंग, परिवहन और वितरण के पूरे नेटवर्क तक ले जाने की मांग की।
मृतकों के परिवारों के लिए मुआवजा
सरकार ने घटना के बाद ₹4 लाख मुआवजे की घोषणा की है। सिंघार ने कहा कि मृतकों में अधिकांश गरीब मजदूर और परिवार के एकमात्र कमाने वाले सदस्य थे। इसलिए उन्होंने प्रत्येक मृतक के परिवार को कम से कम ₹25 लाख मुआवजा देने की मांग की। उन्होंने कहा कि मुआवजा जीवन वापस नहीं ला सकता, लेकिन परिवारों के भविष्य को सुरक्षित करने की जिम्मेदारी सरकार की है।

MadhyaBharat 7 September 2026

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