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इंदौर। मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष जीतू पटवारी ने आज इंदौर प्रेस क्लब में आयोजित पत्रकार वार्ता को संबोधित करते हुए मध्यप्रदेश की शिक्षा व्यवस्था, प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं, बेरोजगारी और आगामी 19 सितंबर को इंदौर में होने वाले ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम को लेकर भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोला। पटवारी ने कहा कि भाजपा सरकार ने मध्यप्रदेश की शिक्षा व्यवस्था को लगातार कमजोर किया है। प्रदेश के अनेक स्कूल जर्जर हैं, शिक्षकों की कमी है, शिक्षा महंगी होती जा रही है और सरकारी शिक्षा व्यवस्था पर विद्यार्थियों का भरोसा लगातार कम हो रहा है। उन्होंने कहा कि शिक्षा किसी विचारधारा की प्रयोगशाला नहीं, बल्कि ज्ञान, तर्क, शोध और वैज्ञानिक सोच का केंद्र होनी चाहिए
पटवारी ने कहा कि उच्च शिक्षा संस्थानों में वैचारिक हस्तक्षेप बढ़ना गंभीर चिंता का विषय है। उन्होंने आरोप लगाया कि शिक्षा संस्थानों को ज्ञान और शोध के केंद्र के बजाय एक विशेष विचारधारा के प्रभाव में लाने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि इतिहास और पाठ्यक्रमों को वैचारिक नजरिये से प्रभावित करने के बजाय शिक्षा नीति की स्वतंत्र, निष्पक्ष और वैज्ञानिक समीक्षा होनी चाहिए। सरकार को स्पष्ट करना चाहिए कि क्या वह शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता, वैज्ञानिक सोच और वैश्विक प्रतिस्पर्धा के अनुरूप गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए तैयार है?
पटवारी ने कहा कि मध्यप्रदेश के 2026-27 बजट में शिक्षा, खेल, कला एवं संस्कृति क्षेत्र के लिए ₹52,917 करोड़ का प्रावधान बताया गया है, जबकि 2025-26 के संशोधित अनुमान में यह राशि ₹46,844 करोड़ थी। उन्होंने कहा कि बजट बढ़ाने के दावे अपनी जगह हैं, लेकिन असली सवाल यह है कि उसका लाभ विद्यार्थी और शिक्षक तक कितना पहुंच रहा है।उन्होंने कहा, “जर्जर स्कूल, शिक्षकों की कमी, महंगी शिक्षा और परीक्षा व्यवस्था में अविश्वास—इन सवालों का जवाब सरकार को देना होगा।”
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि मध्यप्रदेश में प्रतियोगी परीक्षाओं और भर्ती व्यवस्था को लेकर युवाओं का भरोसा लगातार कमजोर हुआ है। उन्होंने व्यापम/MPESB, पुलिस आरक्षक भर्ती, नर्सिंग भर्ती और MPPSC सहित विभिन्न परीक्षाओं में सामने आई कथित गड़बड़ियों का उल्लेख करते हुए सरकार से दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की मांग की। उन्होंने कहा कि उपलब्ध सरकारी रिकॉर्ड और रिपोर्टों के अनुसार, 2020 से जून 2026 के बीच MPESB ने 73 परीक्षाएं आयोजित कीं और एक दर्जन से अधिक परीक्षाएं कथित अनियमितताओं एवं फर्जीवाड़े से जुड़े पुलिस मामलों की जद में आईं। तीन भर्ती परीक्षाएं रद्द भी हुईं।
नर्सिंग भर्ती परीक्षा का उदाहरण देते हुए श्री पटवारी ने कहा कि 2023 में स्टाफ नर्स भर्ती परीक्षा का पेपर लीक होने के बाद परीक्षा रद्द करनी पड़ी और आठ लोगों की गिरफ्तारी हुई।उन्होंने कहा मध्यप्रदेश में युवा सालों मेहनत करता है, फीस भरता है, कोचिंग करता है, परीक्षा देता है और जब पेपर लीक या भर्ती में गड़बड़ी होती है तो उसकी पूरी मेहनत बर्बाद हो जाती है। सरकार को बताना चाहिए कि ऐसे मामलों में कितने दोषियों को कठोर सजा हुई?”
पटवारी ने कहा कि मध्यप्रदेश में बेरोजगारी गंभीर स्थिति में पहुंच चुकी है। उन्होंने कहा कि सरकारी आंकड़ों में लगभग 30 लाख युवा बेरोजगार बताए जाते हैं और बड़ी संख्या में मध्यप्रदेश के युवा रोजगार की तलाश में दूसरे राज्यों का रुख कर रहे हैं। प्रदेश के बच्चे रोजगार के लिए गुजरात, महाराष्ट्र, राजस्थान, दिल्ली और दूसरे राज्यों में जाने को मजबूर हों, उस प्रदेश में सरकार को उत्सव और प्रचार से पहले रोजगार पर जवाब देना चाहिए।
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