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भोपाल। भोपाल में मेट्रो अभी तक सफल होती दिखाई नहीं दे रही। यात्रियों की संख्या बेहद कम है। लिहाजा मेट्रो का खर्च निकल पाना भी मुश्किल हो रहा। मेट्रो का खर्च निकालने के लिए प्रबंधन नए नए तरीके अपना रहा। जहां मेट्रो को यात्रियों के आवागवन के लिए बनाया गया था वहां अब इसे मनोरंजन का साधन बनाया जा रहा। यानी करोड़ो का प्रोजेक्ट खर्च करने के बाद इसमें बर्थडे और प्री वेडिंग कराई जा रही। अगर यही करना था तो डिपो में सैंपल के तौर पर खड़ी मेट्रो को क्यों हटा दिया गया। मेट्रो का सफर आखिर यात्री क्यों नहीं करना चाहते यह सवाल है। क्या मेट्रो का रूट गलत चुना गया। क्या मेट्रो स्टेशन इतने पास रखे गए कि यात्री को सुविधा नहीं हो रही। क्या मेट्रो स्टेशन से दूसरी जगह जाने की सुविधा नहीं है। क्या मेट्रो से ज्यादा खिफायती है बस। सवाल ये भी की क्या मेट्रो वाकई यात्रियों को ध्यान में रखकर बनाई गई थी। या श्रेय लेने की होड़ में आनन फानन में पूरा प्रोजेक्ट तैयार हुआ। यही नहीं आय के लिए स्टेशन की खाली जगह से लेकर 700 से अधिक पिलर और मेट्रो कोच को भी कमाई का साधन बनाया जा रहा है। 8 स्टेशनों की सेमी-नेमिंग और को-ब्रांडिंग होगी। मध्यप्रदेश मेट्रो रेल कार्पोरेशन लिमिटेड (एमपीएमआरसीएल) ने भोपाल और इंदौर मेट्रो के चुनिंदा स्टेशनों के सेमी-नेमिंग और को-ब्रांडिंग के अधिकार देने के लिए टेंडर जारी किया है। यह अधिकार तीन साल के लिए दिया जाएगा। भोपाल में एम्स से सुभाष नगर तक के आठ स्टेशन इस योजना में शामिल किए गए हैं। अब सवाल यह है कि करोड़ों के प्रोजेक्ट को केवल ब्रांडिंग के लिए तैयार किया गया है। ब्रांडिंग इनमें एम्स, अलकापुरी, डीआरएम ऑफिस, रानी कमलापति रेलवे स्टेशन, एमपी नगर, बोर्ड ऑफिस चौराहा, केंद्रीय विद्यालय और सुभाष नगर स्टेशन शामिल हैं। कंपनियां एक या एक से अधिक स्टेशनों के लिए बोली लगा सकती हैं। बोली जमा करने की तारीख 22 से 29 अक्टूबर तक तय की गई है। अब स्टेशन के नाम के साथ ब्रांड का नाम भी जोड़ा जा सकेगा।
स्टेशन की जगह और 700 पिलर से
मेट्रो कॉर्पोरेशन कमाई करेगा। इसे लाइसेंस पर देने की प्रक्रिया शुरू कर चुका है। इसके तहत बोर्ड ऑफिस चौराहा स्टेशन के ग्राउंड फ्लोर की करीब 620 वर्गमीटर और सुभाष नगर स्टेशन की करीब 2470 वर्गमीटर जगह व्यावसायिक गतिविधियों के लिए दी जा रही है। इसके अलावा प्राथमिक कॉरिडोर के 700 से ज्यादा एलिवेटेड पिलरों को विज्ञापन के लिए लीज पर देने की तैयारी है। चयनित स्टेशनों पर इनडोर और आउटडोर विज्ञापन के अधिकार भी कंपनियों को दिए जा रहे हैं।कोच में बर्थडे से प्री-वेडिंग तक कर सकेंगे सेलिब्रेशन। गैर-किराया आय को बढ़ाने के लिए मेट्रो ने मई महीने में ‘सेलिब्रेशन ऑन व्हील्स’ योजना शुरू की थी। इस योजना के तहत लोग मेट्रो कोच में बर्थडे पार्टी, किटी पार्टी, प्री-वेडिंग सेरेमनी, फोटोशूट और फिल्म शूटिंग जैसे आयोजन कर सकते हैं। इसके लिए खड़े कोच का शुल्क 5000 रुपये प्रति घंटा और चलती मेट्रो में आयोजन का शुल्क 7000 रुपये प्रति घंटा है।
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