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मध्यप्रदेश के करीब 15 शहर स्वच्छ सर्वेक्षण 2025-26 की रैंकिंग में शामिल हैं। इस बार सर्वेक्षण के परिणाम अक्टूबर में जारी होने की संभावना है। प्रदेश के कई शहरों में कचरा प्रबंधन की व्यवस्था और सड़कों पर जमा कचरा रैंकिंग को प्रभावित कर सकता है। एक साल में रोजाना निकलने वाले घरेलू कचरे की मात्रा करीब 1730 टन बढ़ी है। वहीं कचरे की प्रोसेसिंग में भी अंतर बढ़ा है। पहले जहां 18.05 टन प्रतिदिन कचरा प्रोसेस नहीं हो पा रहा था, अब यह आंकड़ा 55.39 टन प्रतिदिन तक पहुंच गया है।
प्रदेश की 34 डंपिंग साइटों पर करीब 13 लाख मीट्रिक टन पुराना कचरा जमा होने की बात सामने आई है। स्वच्छता सर्वेक्षण में कुल 12,500 अंकों के आधार पर शहरों का आकलन होगा। इसमें ओडीएफ, वाटर प्लस और गार्बेज फ्री सिटी के लिए अलग-अलग अंक तय हैं, जबकि 10,500 अंक मैदानी निरीक्षण के आधार पर दिए जाएंगे। भोपाल, इंदौर, जबलपुर, ग्वालियर, उज्जैन, सागर और सतना जैसे शहरों में कचरा प्रबंधन की स्थिति इस लिहाज से अहम रहेगी। सर्वे टीमों ने फरवरी-मार्च के दौरान नगरीय निकायों का निरीक्षण किया था। इस बार धार्मिक, पर्यटन और विरासत स्थलों के साथ स्कूलों में स्वच्छता से जुड़े व्यवहार का भी जायजा लिया गया।
सर्वेक्षण में खुले में शौच और खुले में यूरिनेशन रोकने की व्यवस्था को भी जांच का हिस्सा बनाया गया। नई व्यवस्था के तहत सार्वजनिक स्थानों पर स्वच्छता के साथ लोगों के व्यवहार और सुविधाओं की उपलब्धता को भी देखा गया। इसके अलावा इस बार ‘स्वच्छ शहर जोड़ी’ नाम से नई पुरस्कार श्रेणी भी शामिल की गई है। इसमें बेहतर प्रदर्शन करने वाला शहर आसपास के किसी दूसरे शहर के साथ मिलकर स्वच्छता के क्षेत्र में काम कर सकता है। पिछले वर्ष मध्यप्रदेश के आठ शहरों को अलग-अलग श्रेणियों में स्वच्छता पुरस्कार मिले थे, ऐसे में इस बार भी शहरों के प्रदर्शन पर नजर रहेगी।
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