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मध्यप्रदेश में करीब 21 साल बाद सार्वजनिक बस सेवा दोबारा शुरू होने जा रही है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी भोपाल के भेल दशहरा मैदान से मुख्यमंत्री सुगम यात्री परिवहन सेवा की शुरुआत करेंगे। पहले चरण में 7 शहरों के लिए 351 इंटरसिटी और इंट्रासिटी बसें संचालित की जाएंगी। इस सेवा का संचालन पीपीपी मॉडल पर होगा और सरकार की निगरानी रहेगी। योजना का उद्देश्य शहरों के साथ ग्रामीण क्षेत्रों की बस कनेक्टिविटी को मजबूत करना है। आने वाले समय में इसे प्रदेश की करीब 75 प्रतिशत ग्राम पंचायतों तक विस्तार देने की योजना है।
पहले चरण में इंदौर में 145 बसें, भोपाल में 106, जबलपुर में 67 और रीवा में 18 इंटरसिटी बसें चलेंगी। इसके अलावा देवास में 10, कटनी में 3 और भिंड में 2 इंटरसिटी बसें शुरू की जाएंगी। इंदौर में 50 इंटरसिटी और 95 इंट्रासिटी, जबकि भोपाल में 23 इंटरसिटी और 83 इंट्रासिटी बसें संचालित होंगी। जबलपुर में 14 इंटरसिटी और 53 इंट्रासिटी बसों की व्यवस्था की गई है। रूट का निर्धारण ट्रैफिक और ओरिजिन-डेस्टिनेशन सर्वे के आधार पर किया गया है।
बस सेवा के संचालन के लिए निजी ऑपरेटरों के साथ अनुबंध के अलावा इंटेलिजेंट ट्रांसपोर्ट मैनेजमेंट सिस्टम और परिवहन सुविधाओं के विकास की व्यवस्था की गई है। सिस्टम के जरिए बसों की लाइव लोकेशन, गति और संचालन की निगरानी की जाएगी। बस टर्मिनल, डिपो और बस स्टॉप जैसी सुविधाएं भी विकसित की जाएंगी। राज्य स्तर पर मध्यप्रदेश यात्री परिवहन एवं इन्फ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड निगरानी करेगा, जबकि सात क्षेत्रीय कंपनियां और जिला स्तर पर कलेक्टर की अध्यक्षता वाली समितियां जमीनी स्तर पर व्यवस्था देखेंगी। योजना के तहत हर साल करीब 2,500 से 3,000 बसें जोड़ने का लक्ष्य रखा गया है।
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