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नई दिल्ली। भारत और जापान के बीच संयुक्त ऋण व्यवस्था का उद्देश्य उन्नत निम्न-कार्बन प्रौद्योगिकियों के उपयोग को बढ़ावा देना, जलवायु वित्त जुटाना, प्रौद्योगिकी सहयोग को सुगम बनाना और भारत में उच्च-स्तरीय उत्सर्जन कटौती एवं निष्कासन का समर्थन करना है। यह तंत्र अंतर्राष्ट्रीय कार्बन बाजारों में विश्वास और पारदर्शिता को मजबूत करते हुए भारत में सतत विकास में योगदान देगा।
इस नियमावली का शुभारंभ पेरिस समझौते के अनुच्छेद 6.2 के तहत भारत और जापान के बीच द्विपक्षीय सहयोग को व्यावहारिक रूप देने में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है। इससे पहले 7 अगस्त 2025 को सहयोग ज्ञापन (एमओसी) पर हस्ताक्षर किए गए थे और 8 जून 2026 को कार्यान्वयन के नियम (आरओआई) अपनाए गए थे।
यह विकास संस्थागत तैयारी से कार्यान्वयन की ओर बढ़ने का संकेत देता है और भारत-जापान संयुक्त समन्वय परियोजना (जेसीएम) के तहत गतिविधियों के कार्यान्वयन के लिए एक स्पष्ट, पारदर्शी और व्यापक प्रक्रियात्मक ढांचा स्थापित करता है। यह नियमावली संपूर्ण परियोजना चक्र के लिए विस्तृत प्रक्रियाएं प्रदान करती है—जिसमें प्रोजेक्ट आइडिया नोट जमा करने से लेकर जेसीएम क्रेडिट के जारी होने और अधिकृत होने तक तक सब शामिल है।
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