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नई दिल्ली। केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कांग्रेस और विपक्षी दलों पर निशाना साधा। उन्होंने कहा विपक्ष को लोकतंत्र की चिंता नहीं है, हार की खीज है और जनादेश का अपमान करना है।सोचिए 19 दल, 3 किलोमीटर का मार्च, और माँग क्या? कि देश को बैलेट पेपर के ज़माने में वापस ले चलो।न मशीन चलेगी, न मतदाता सूची की सफ़ाई। खड़गे जी की तीन 'नॉन-नेगोशिएबल' माँगें, जरा आप सुनिए... "ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा, SIR को रद्द करना और बैलट पेपर पर चुनाव कराना।"मतलब वही दौर, जब 80-90 के दशक में बिहार और यूपी में मतपेटियाँ लूटी जाती थीं, दूसरों के नाम पर वोट पड़ते थे। उसी दौर को वापस लाना है?फ़र्ज़ी वोट रोकने के लिए चुनाव व्यवस्था में लगातार सुधार हुए हैं। EVM ने बूथ लूट पर लगाम लगाई, और फ़ोटो वोटर आईडी व सूची की जाँच ने फ़र्ज़ी मतदाताओं पर रोका। S.I.R. भी सुधार की इसी कड़ी का हिस्सा है।मृत, डुप्लिकेट और जगह छोड़ चुके नाम सूची से हटें। जब सूची ही साफ़ नहीं होगी, तो साफ़ चुनाव कैसे होगा? और SIR रद्द करने की माँग का मतलब क्या है, कि गड़बड़ सूची पर ही चुनाव होते रहें?तेलंगाना, हिमाचल और झारखंड में सरकारें बनीं। जीतें तो जनादेश, हारें तो मशीन और सूची में खोट? यह दोहरा रवैया नहीं तो क्या है?सुधार का रास्ता आगे जाता है, पीछे नहीं।जनादेश का सम्मान कीजिए, सुधार का विरोध नहीं।
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