Since: 23-09-2009
भोपाल। मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष जीतू पटवारी ने मध्य प्रदेश में 27 प्रतिशत ओबीसी आरक्षण को लेकर आए हाईकोर्ट के फैसले पर भाजपा सरकार को घेरते हुए कहा कि यह प्रदेश की 50 प्रतिशत से अधिक आबादी के अधिकारों से जुड़ा गंभीर विषय है। भाजपा सरकार की कमजोर पैरवी और ओबीसी वर्ग के सामाजिक एवं शैक्षणिक पिछड़ेपन से जुड़े पर्याप्त तथ्य न्यायालय के समक्ष प्रभावी ढंग से प्रस्तुत नहीं किए जाने के कारण आरक्षण की लड़ाई को बड़ा झटका लगा है। पटवारी ने कहा कि वर्ष 2019 में तत्कालीन मुख्यमंत्री श्री कमलनाथ के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार ने ओबीसी वर्ग को सामाजिक न्याय दिलाने के उद्देश्य से आरक्षण को 14 प्रतिशत से बढ़ाकर 27 प्रतिशत करने का कानून बनाया था। कांग्रेस सरकार की मंशा पिछड़े वर्ग को उसका संवैधानिक अधिकार दिलाने की थी, लेकिन भाजपा सरकार ने बीते वर्षों में इस महत्वपूर्ण मुद्दे को कानूनी उलझनों में फंसा रहने दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार की नीयत और उसकी पैरवी पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं। ओबीसी आरक्षण को लेकर सरकार ने न्यायालय में कौन-से ठोस सामाजिक और शैक्षणिक आंकड़े प्रस्तुत किए, 50 प्रतिशत की आरक्षण सीमा से संबंधित संवैधानिक प्रावधानों के तहत अपना पक्ष कितनी मजबूती से रखा और आरक्षण की रक्षा के लिए क्या प्रभावी प्रयास किए—इन सभी सवालों का जवाब सरकार को देना चाहिए।पटवारी ने आरोप लगाया कि ओबीसी आरक्षण को रोकने के लिए वकीलों पर करोड़ों खर्च किए जाने का दावा सामने आया है। उन्होंने कहा कि ओबीसी वर्ग की दुहाई देने वाले भाजपा नेताओं, विशेषकर पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और वर्तमान मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को प्रदेश की जनता के सामने अपनी भूमिका स्पष्ट करनी चाहिए। यह आरोप है कि आरक्षण की रक्षा के लिए प्रभावी पैरवी करने के बजाय सरकार की कार्रवाई ने ओबीसी वर्ग के अधिकारों को नुकसान पहुंचाया। कहा कि 87-13 प्रतिशत के फॉर्मूले के चलते पहले से ही हजारों युवाओं की भर्तियां और नियुक्तियां प्रभावित हुई हैं। अब 27 प्रतिशत आरक्षण से संबंधित फैसले ने उन अभ्यर्थियों की चिंता और बढ़ा दी है, जिनका चयन या नियुक्ति आरक्षण विवाद के कारण लंबित है। भाजपा सरकार की नीतियों और कानूनी लड़ाई के बीच प्रदेश के युवाओं का भविष्य अनिश्चितता में नहीं छोड़ा जा सकता।पटवारी ने ओबीसी वर्ग के युवाओं और नागरिकों से अपील करते हुए कहा, “निराश होने की आवश्यकता नहीं है। कांग्रेस पार्टी आपके साथ खड़ी है। हम सुप्रीम कोर्ट जाएंगे और देश के बड़े से बड़े अधिवक्ताओं के माध्यम से आपके अधिकारों की लड़ाई पूरी ताकत से लड़ेंगे। ओबीसी वर्ग को उसका अधिकार दिलाने के लिए कांग्रेस पार्टी प्रतिबद्ध है। उन्होंने राज्य सरकार से मांग की कि हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ अविलंब सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका (SLP) दायर की जाए और अनुभवी वकीलों की मजबूत टीम के साथ प्रभावी कानूनी पैरवी की जाए। साथ ही, सरकार विधानसभा का विशेष सत्र बुलाकर ओबीसी आरक्षण की रक्षा के लिए अपनी ठोस कार्ययोजना प्रदेश की जनता के सामने रखे। पटवारी ने कहा कि मध्य प्रदेश में तत्काल जातिगत जनगणना कराई जानी चाहिए, ताकि विभिन्न सामाजिक वर्गों की वास्तविक आबादी, सामाजिक स्थिति और शैक्षणिक पिछड़ेपन से जुड़े प्रमाणिक आंकड़े उपलब्ध हों तथा आरक्षण संबंधी नीतियों को कानूनी और संवैधानिक आधार पर मजबूती दी जा सके। उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी ओबीसी वर्ग के अधिकारों की लड़ाई सड़क से लेकर न्यायालय तक लड़ेगी। वर्ष 2028 में कांग्रेस की सरकार बनने पर ओबीसी वर्ग को उसका अधिकार दिलाने के लिए हर आवश्यक कदम उठाया जाएगा। भाजपा सरकार को ओबीसी समाज के साथ किए गए कथित छल और आरक्षण के मुद्दे पर अपनी जवाबदेही से बचने नहीं दिया जाएगा।
जीतू पटवारी ने अंत में कहा कि ओबीसी आरक्षण केवल किसी एक वर्ग का मुद्दा नहीं, बल्कि सामाजिक न्याय, समान अवसर और युवाओं के भविष्य का सवाल है। कांग्रेस पार्टी इस लड़ाई से पीछे नहीं हटेगी और ओबीसी वर्ग को उसका हक दिलाने के लिए पूरी ताकत से संघर्ष करेगी।
MadhyaBharat
|
All Rights Reserved ©2026 MadhyaBharat News.
Created By:
Medha Innovation & Development |