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मध्यप्रदेश विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने कांग्रेस मुख्यालय भोपाल में 10 अक्टूबर 2026 को 27% OBC आरक्षण पर हाईकोर्ट के फैसले को लेकर प्रेस वार्ता की। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने कहा कि 9 अक्टूबर को आए फैसले से प्रदेश की 50% से अधिक आबादी वाले OBC समाज की उम्मीदों को झटका लगा है। सिंघार ने कहा कि समाज को उम्मीद थी कि 27% आरक्षण से बच्चों को शिक्षा और रोजगार में नए अवसर मिलेंगे। 159 पृष्ठों का यह फैसला न्यायमूर्ति आनंद पाठक एवं न्यायमूर्ति विनय सराफ की खंडपीठ ने रिट याचिका क्रमांक 5901/2019 और संबंधित याचिकाओं पर सुनाया। उन्होंने 1983 की महाजन आयोग रिपोर्ट पर निर्भरता, 7.26 करोड़ की आबादी के मुकाबले लगभग 10 हजार लोगों के सर्वेक्षण, अन्य सामाजिक वर्गों को शामिल न किए जाने, OBC की शैक्षणिक स्थिति पर 2023 की रिपोर्ट, 50% आरक्षण सीमा और OBC के लिए स्वीकृत प्रथम श्रेणी के पदों में रिक्तियों को लेकर भाजपा सरकार से सवाल किए।
नेता प्रतिपक्ष सिंघार ने उठाये गंभीर सवाल
1. 27% OBC आरक्षण: उम्मीदों के विपरीत आया फैसला
➢ मध्यप्रदेश की 50% से अधिक आबादी वाला OBC समाज लंबे समय से 27% आरक्षण पर फैसले का इंतजार कर रहा था।
➢ समाज को उम्मीद थी कि आरक्षण से उसके बच्चों को शिक्षा और रोजगार में अधिक अवसर मिलेंगे।
➢ 9 अक्टूबर 2026 को हाईकोर्ट का फैसला आया, जो इन उम्मीदों के विपरीत रहा।
➢ अदालत ने कानून और साक्ष्यों के आधार पर निर्णय दिया, लेकिन सरकार की जिम्मेदारी थी कि वह अपने पक्ष में मजबूत और विश्वसनीय तथ्य प्रस्तुत करे।
2. 159 पृष्ठों के फैसले में सरकार के साक्ष्यों पर गंभीर सवाल
➢ 9 अक्टूबर 2026 को मध्यप्रदेश हाईकोर्ट, जबलपुर की दो सदस्यीय खंडपीठ ने 27% OBC आरक्षण पर फैसला सुनाया।
➢ खंडपीठ में न्यायमूर्ति आनंद पाठक और न्यायमूर्ति विनय सराफ शामिल थे।
➢ यह फैसला रिट याचिका क्रमांक 5901/2019 और उससे जुड़ी अन्य याचिकाओं पर दिया गया।
➢ 159 पृष्ठों के इस फैसले को 5 अगस्त 2026 को सुरक्षित रखा गया था और 9 अक्टूबर 2026 को सुनाया गया।
➢ फैसले में सरकार द्वारा प्रस्तुत साक्ष्यों की गुणवत्ता, दायरे और नवीनता को लेकर सवाल उठे हैं।
3. OBC आरक्षण के लिए 1983 के आंकड़ों पर निर्भरता — नए आंकड़े क्यों नहीं जुटाए गए?
➢ हाईकोर्ट ने कहा कि राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग की 1996–97 और 2019–20 की सिफारिशें 1983 की महाजन आयोग रिपोर्ट पर आधारित थीं।
➢ अदालत ने पाया कि इन सिफारिशों के लिए इस उद्देश्य से नए आंकड़े एकत्र नहीं किए गए थे।
➢ सवाल है कि 27% OBC आरक्षण के समर्थन में सरकार ने नए, व्यापक और विश्वसनीय आंकड़े क्यों नहीं जुटाए?
4. 7.26 करोड़ की आबादी के मुकाबले केवल लगभग 10 हजार लोगों का सर्वेक्षण
➢ हाईकोर्ट ने डॉ. बी. आर. आंबेडकर सामाजिक विज्ञान विश्वविद्यालय (BRAUSS) की 2023 की रिपोर्ट के आधार बने सीमित सर्वेक्षण पर सवाल उठाए।
➢ मध्यप्रदेश की 7.26 करोड़ आबादी के मुकाबले पूरे प्रदेश में लगभग 10 हजार लोगों का सर्वेक्षण किया गया।
➢ अदालत ने कहा कि सर्वेक्षण का सीमित दायरा रिपोर्ट को कमजोर बनाता है।
5. सर्वेक्षण में अन्य सामाजिक वर्गों को शामिल क्यों नहीं किया गया?
➢ हाईकोर्ट ने कहा कि सामाजिक पिछड़ेपन का तुलनात्मक आकलन करने के लिए सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुरूप समाज के सभी वर्गों को सर्वेक्षण में शामिल करना जरूरी था।
➢ केवल OBC वर्ग के लगभग 10 हजार लोगों का सर्वेक्षण किए जाने से अन्य सामाजिक वर्गों के साथ तुलना संभव नहीं हो सकी।
➢ सरकार बताए कि सभी सामाजिक वर्गों को शामिल करते हुए व्यापक सर्वेक्षण क्यों नहीं कराया गया।
6. OBC की शैक्षणिक स्थिति पर 2023 की रिपोर्ट के निष्कर्ष पर हाईकोर्ट की आपत्ति
➢ हाईकोर्ट ने BRAUSS की 2023 की रिपोर्ट में OBC वर्ग की शैक्षणिक स्थिति को अत्यंत कमजोर बताने वाले निष्कर्ष पर आपत्ति जताई।
➢ अदालत ने कहा कि यह निष्कर्ष अखिल भारतीय उच्च शिक्षा सर्वेक्षण (AISHE) की रिपोर्ट और वास्तविक स्थिति के विपरीत था।
➢ उमंग सिंघार ने सवाल किया कि सरकार ने अदालत में इन आंकड़ों का खंडन क्यों नहीं किया।
➢ हाईकोर्ट के अनुसार, खाली पद भरने से प्रथम श्रेणी में OBC का प्रतिनिधित्व तीन गुना हो सकता था।
➢ अदालत ने कहा कि OBC का कम प्रतिनिधित्व इन रिक्त पदों को भरने में राज्य की विफलता का सीधा परिणाम है।
➢ हाईकोर्ट ने पाया कि OBC के लिए स्वीकृत प्रथम श्रेणी के 68.24% पद और कुल स्वीकृत पदों में 51.17% पद खाली थे।
7. OBC के लिए स्वीकृत प्रथम श्रेणी के दो-तिहाई से अधिक पद खाली
➢ उन्होंने पूछा कि सरकार ने असाधारण परिस्थितियां साबित करने के लिए पर्याप्त आधार क्यों नहीं तैयार किया और अध्ययन की कमियां दूर करने की जिम्मेदारी किसकी थी।
➢ हाईकोर्ट ने कहा कि 50% से अधिक आरक्षण के लिए असाधारण परिस्थितियां जरूरी हैं, लेकिन इस मामले में ऐसी परिस्थितियां साबित नहीं हुईं।
➢ मध्यप्रदेश में SC, ST और प्रस्तावित OBC आरक्षण को मिलाकर कुल आरक्षण 63% हो रहा था।
➢ इंद्रा साहनी फैसले में 1992 से आरक्षण की 50% सीमा से संबंधित कानूनी कसौटी स्पष्ट थी।
➢1992 से कानून स्पष्ट था, फिर 50% सीमा पार करने का आधार क्यों नहीं रखा गया?
सिंघार के भाजपा सरकार से सवाल
➢ 27% OBC आरक्षण के समर्थन में नए और व्यापक आंकड़े जुटाने के बजाय भाजपा सरकार 1983 की महाजन आयोग रिपोर्ट पर निर्भर क्यों रही?
➢ 7.26 करोड़ की आबादी वाले मध्यप्रदेश में 2023 की BRAUSS रिपोर्ट के लिए सर्वेक्षण केवल लगभग 10 हजार लोगों तक सीमित क्यों रखा गया?
➢ सामाजिक पिछड़ेपन का तुलनात्मक आकलन करने के लिए सर्वेक्षण में अन्य सामाजिक वर्गों को शामिल क्यों नहीं किया गया?
➢ 2023 की BRAUSS रिपोर्ट में सर्वेक्षण किए गए OBC वर्ग की शैक्षणिक स्थिति को अत्यंत कमजोर क्यों बताया गया, जबकि हाईकोर्ट ने इस निष्कर्ष को AISHE के आंकड़ों और वास्तविकता के विपरीत माना?
➢ हाईकोर्ट के फैसले में सामने आई कमियों को दूर करने और विश्वसनीय आंकड़े जुटाने के लिए भाजपा सरकार अब क्या ठोस कदम उठाएगी?
➢ भाजपा सरकार OBC समाज को बताए कि 27% आरक्षण के समर्थन में हाईकोर्ट के सामने अपना पक्ष मजबूत करने के लिए उसने क्या प्रयास किए?
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