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भोपाल। मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष जीतू पटवारी ने अमानक बीजों की बढ़ती समस्या, किसानों को हो रहे आर्थिक नुकसान और बीज गुणवत्ता की निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा चिंताजनक बात यह है कि बीजों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए व्यवस्था मौजूद होने के बावजूद अमानक बीजों के मामले लगातार सामने आ रहे हैं। उन्होंने पत्र में उल्लेख किया कि वित्त वर्ष 2026-27 में 15 सितंबर तक देशभर में जांचे गए 93,867 बीज नमूनों में से 4,006 नमूने मानकों पर खरे नहीं उतरे। इनमें महाराष्ट्र के 2,360, मध्य प्रदेश के 537, उत्तर प्रदेश के 303 और छत्तीसगढ़ के 234 नमूने शामिल बताए गए हैं। इसी अवधि में देशभर में बीज बिक्री रोकने के 2,362 आदेश जारी हुए और 1,116 मामले दर्ज किए गए। मध्य प्रदेश में 537 अमानक नमूनों का सामने आना प्रदेश की बीज गुणवत्ता निगरानी व्यवस्था और किसानों को उपलब्ध कराए जा रहे बीजों की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
जीतू पटवारी ने केंद्रीय कृषि मंत्री से निम्नलिखित मांगें की हैं
1. मुआवजे का स्पष्ट प्रावधान: घटिया बीजों के कारण फसल खराब होने पर किसान को बीज निर्माता कंपनी, आपूर्तिकर्ता अथवा संबंधित जिम्मेदार पक्ष से समयबद्ध और प्रभावी कानूनी प्रक्रिया के माध्यम से मुआवजा दिलाने की व्यवस्था बनाई जाए।
2. मध्य प्रदेश के मामलों की समीक्षा: प्रदेश में सामने आए 537 अमानक बीज नमूनों के मामलों की विस्तृत जांच कर संबंधित कंपनियों, विक्रेताओं और उनके विरुद्ध की गई कार्रवाई का विवरण सार्वजनिक किया जाए।
3. किसानों के नुकसान का आकलन: घटिया बीजों से प्रभावित किसानों की फसलों का कृषि विभाग द्वारा समयबद्ध सर्वेक्षण कराया जाए और पात्र किसानों को उचित मुआवजा दिलाया जाए।
4. दोषी कंपनियों पर कठोर कार्रवाई: अमानक बीज बेचने वाली कंपनियों और विक्रेताओं के खिलाफ प्रभावी दंडात्मक कार्रवाई की जाए। गंभीर मामलों में आर्थिक जुर्माना, लाइसेंस निलंबन और नियमानुसार निरस्तीकरण सुनिश्चित किया जाए।
5. जिला स्तर पर शिकायत व्यवस्था: प्रत्येक जिले में बीज गुणवत्ता संबंधी शिकायतों के त्वरित निपटारे के लिए सरल, पारदर्शी और समयबद्ध व्यवस्था बनाई जाए। जांच के दौरान बीज के नमूनों और संबंधित रिकॉर्ड को सुरक्षित रखने की व्यवस्था भी हो।
6. राष्ट्रीय स्तर पर निगरानी: सभी राज्यों में अमानक बीजों के नमूनों, दर्ज मामलों, दोषी कंपनियों पर हुई कार्रवाई और किसानों को दिए गए मुआवजे का सार्वजनिक डैशबोर्ड तैयार किया जाए, ताकि जवाबदेही सुनिश्चित हो सके।
श्री पटवारी ने केंद्रीय कृषि मंत्री से आग्रह किया कि इस गंभीर विषय पर तत्काल राष्ट्रीय स्तर पर समीक्षा कराई जाए, किसानों को हुए नुकसान की भरपाई के लिए स्पष्ट कानूनी प्रावधान सुनिश्चित किए जाएं और दोषियों के विरुद्ध की गई कार्रवाई को सार्वजनिक किया जाए।
उन्होंने कहा कि किसान को केवल खेती करने की सलाह देना सरकार की जिम्मेदारी पूरी करना नहीं है। किसान को गुणवत्तापूर्ण बीज उपलब्ध कराना, उसकी फसल को घटिया बीजों से होने वाले नुकसान से बचाना और लापरवाही की स्थिति में उसे न्याय दिलाना भी सरकार का दायित्व है। किसान की मेहनत और पूंजी की कीमत पर किसी कंपनी को मुनाफा कमाने की छूट नहीं दी जा सकती।
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