Since: 23-09-2009
भोपाल। आज भारतीय किसान संघ द्वारा आयोजित एक महत्वपूर्ण प्रेस कॉन्फ्रेंस में किसानों को आ रही व्यावहारिक व बुनियादी समस्याओं को प्रमुखता से उठाया गया। संगठन ने सिंचाई, अघोषित बिजली कटौती, फसल क्षतिपूर्ति, समर्थन मूल्य (MSP) पर शत-प्रतिशत खरीदी और खाद वितरण जैसी गंभीर समस्याओं को लेकर शासन-प्रशासन के समक्ष निम्नलिखित माँगें रखीं:
अल्प वर्षा वाले जिलों को सूखाग्रस्त घोषित करने की माँग:
कम बारिश से प्रभावित जिलों को तत्काल प्रभाव से 'सूखाग्रस्त' घोषित किया जाए और उनके पुनर्वास व विकास के लिए विशेष योजनाएँ लागू की जाएँ।
सिंचाई व्यवस्था का सुदृढ़ीकरण एवं जल उपयोग की प्राथमिकता:
अधूरी पड़ी सिंचाई योजनाओं को अविलंब पूरा किया जाए तथा नहरों व तालाबों का जीर्णोद्धार हो।
पेयजल के बाद उपलब्ध जल का प्राथमिक अधिकार कृषि कार्य के लिए तय किया जाए।
सूखा प्रभावित क्षेत्रों में कम पानी में पकने वाले उन्नत बीजों की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित की जाए।
प्रत्यक्ष सर्वे से फसल क्षतिपूर्ति एवं बीमा लाभ:
खरीफ सीजन में अतिवृष्टि व अल्पवृष्टि से हुए नुकसान का आकलन सेटेलाइट के बजाय प्रत्यक्ष ग्राउंड सर्वे (नेत्रांकन) के माध्यम से किया जाए। बीमित किसानों को अविलंब फसल बीमा का लाभ और मुआवजा प्रदान किया जाए।
12 घंटे निर्बाध बिजली व ट्रांसफार्मर बैंक की स्थापना:
ग्रामीण क्षेत्रों में अघोषित बिजली कटौती तुरंत बंद कर कृषि के लिए लगातार 12 घंटे बिजली दी जाए।
जले हुए ट्रांसफार्मर तुरंत बदले जाएँ और वितरण केंद्र स्तर पर 10 ट्रांसफार्मर रिजर्व रखने हेतु 'ट्रांसफार्मर बैंक' बनाए जाएँ। 24 घंटे बिजली चाहने वालों को नियमानुसार मीटर कनेक्शन दिए जाएँ।
MSP पर शत-प्रतिशत खरीदी (भावांतर योजना अस्वीकार):
सोयाबीन, धान, मक्का, बाजरा, मूंग, उड़द, मूंगफली आदि फसलों की शत-प्रतिशत खरीदी घोषित न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर ही की जाए। किसानों ने स्पष्ट किया कि उन्हें भावांतर योजना स्वीकार नहीं है।
फसल पंजीयन तिथि में विस्तार:
तकनीकी कमियों या पोर्टल की समस्याओं के कारण पंजीयन से वंचित रह गए किसानों के हित में पंजीयन की अंतिम तिथि तुरंत बढ़ाई जाए।
खाद वितरण प्रणाली में सुधार व कालाबाजारी पर रोक:
ई-टोकन प्रणाली की तकनीकी खामियों का तत्काल निराकरण किया जाए।
DAP सहित अन्य उर्वरकों की किल्लत दूर कर 50% वितरण सहकारी समितियों और 50% निजी व्यापारियों के माध्यम से कराया जाए।
खाद की कालाबाजारी व अवैध जमाखोरी करने वालों पर सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए।
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