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भोपाल।आशीर्वाद का दिया दीपोत्सव कार्यक्रम के लिए टेंडर आवंटन में कथित अनियमितताओं को लेकर म प्र कांग्रेस महासचिव अमित शर्मा ने गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि टेंडर प्रक्रिया में नियमों की अनदेखी कर चहेती कंपनियों को लाभ पहुंचाया गया और जनता की गाढ़ी कमाई के दुरुपयोग की आशंका है। शर्मा ने कहा कि उपलब्ध कराई गई जानकारी के अनुसार, 16 सितंबर को पर्यटन विभाग ने दोपहर 3:46 बजे कंपनियों को ईमेल के माध्यम से टेंडर जारी किया और शाम 5 बजे तक प्रस्ताव जमा करने की समय-सीमा निर्धारित की। आरोप है कि निर्धारित समय-सीमा समाप्त होने के बाद भी टेंडर प्रक्रिया जारी रही और उसी रात अहमदाबाद की कंपनी ‘गो बनाना’ को काम आवंटित करने का आदेश जारी कर दिया गया। यदि ये तथ्य सही हैं, तो यह पूरी प्रक्रिया की पारदर्शिता और निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़े करता है।उन्होंने कहा कि जानकारी के अनुसार, मुख्य टेंडर की राशि लगभग ₹4.18 करोड़ बताई गई, जबकि दिल्ली की ‘दीपाली डिजाइन’ कंपनी द्वारा लगभग ₹8.18 करोड़ का प्रस्ताव दिए जाने की बात सामने आई है। इतनी बड़ी राशि के अंतर और समय-सीमा समाप्त होने के बाद प्राप्त प्रस्तावों की जांच आवश्यक है। यह भी स्पष्ट किया जाना चाहिए कि टेंडर की शर्तें क्या थीं, कितनी कंपनियों ने भाग लिया और किस आधार पर संबंधित कंपनी का चयन किया गया। शर्मा ने कहा कि उज्जैन में आयोजित दीपोत्सव कार्यक्रम में दीपक जलाने के लिए ₹4.18 करोड़ खर्च किए जाने संबंधी दावे पर भी सरकार को जवाब देना चाहिए। यदि यह राशि केवल दीपक जलाने के लिए खर्च की गई, तो प्रति दीपक लागत का हिसाब सार्वजनिक किया जाए। साथ ही, कार्यक्रम की वास्तविक लागत, कार्यादेश, भुगतान, पूरक बिलों और अन्य मदों का पूरा विवरण सार्वजनिक किया जाना चाहिए। संभावित रूप से खर्च बढ़ाकर ₹10 से ₹18 करोड़ तक पहुंचाए जाने की आशंका की भी स्वतंत्र जांच होनी चाहिए। उन्होंने पर्यटन विभाग के अधिकारियों देवेंद्र राय और राहुल अर्गल की भूमिका की निष्पक्ष जांच कराने की मांग करते हुए कहा कि किसी भी अधिकारी को जांच से बाहर नहीं रखा जाना चाहिए। हालांकि, जांच पूरी होने से पहले किसी व्यक्ति को दोषी घोषित करना उचित नहीं है; सरकार को तथ्यों और दस्तावेजों के आधार पर स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। शर्मा ने कहा कि मध्य प्रदेश में प्रतिभाशाली युवा, स्टार्टअप और इवेंट मैनेजमेंट से जुड़ी अनेक कंपनियां मौजूद हैं। ऐसे में गुजरात और अन्य राज्यों की कंपनियों को काम देने के निर्णय के पीछे अपनाए गए मानदंडों को सार्वजनिक किया जाना चाहिए। सरकारी आयोजनों में स्थानीय उद्यमियों को निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा का अवसर मिलना चाहिए।
*CBI जांच और जवाबदेही की मांग*
1. ‘आशीर्वाद का दिया’ कार्यक्रम के टेंडर और भुगतान की पूरी प्रक्रिया की CBI से स्वतंत्र जांच कराई जाए।
2. टेंडर जारी करने, प्रस्ताव प्राप्त करने, मूल्यांकन और कार्यादेश जारी करने से संबंधित सभी दस्तावेज सार्वजनिक किए जाएं।
3. संबंधित अधिकारियों की भूमिका की निष्पक्ष जांच कर दोष सिद्ध होने पर कड़ी कार्रवाई की जाए।
4. कार्यक्रम पर हुए वास्तविक खर्च, पूरक बिलों और भुगतान का विस्तृत ऑडिट कराया जाए।
5. मध्य प्रदेश के युवाओं और स्थानीय कंपनियों को सरकारी कार्यों में पारदर्शी एवं समान अवसर सुनिश्चित किए जाएं।
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