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भोपाल। मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष जीतू पटवारी ने बिजली संकट को लेकर भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश का किसान गंभीर बिजली संकट का सामना कर रहा है। सरकार ने किसानों को खेती और सिंचाई के लिए प्रतिदिन 10 घंटे बिजली देने का वादा किया था, लेकिन प्रदेश के कई क्षेत्रों में किसानों को मुश्किल से 2 घंटे ही बिजली मिल पा रही है। ऐसे में किसान अपनी फसलों की सिंचाई कैसे करेगा और खेती का काम कैसे पूरा कर पाएगा? पटवारी ने कहा कि बिजली संकट का असर केवल किसानों तक सीमित नहीं है, बल्कि आम जनता भी अघोषित बिजली कटौती से परेशान है। प्रदेश के अनेक क्षेत्रों में 10-10 घंटे तक बिजली गुल रहने की शिकायतें सामने आ रही हैं। कहीं किसानों की सिंचाई प्रभावित हो रही है, तो कहीं घरेलू उपभोक्ता भीषण गर्मी और दैनिक जरूरतों के बीच बिजली के अभाव में परेशान हो रहे हैं। बिजली की अनियमित आपूर्ति ने ग्रामीण और शहरी, दोनों क्षेत्रों के लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश में भाजपा सरकार बड़े-बड़े दावे और घोषणाएं करती है, लेकिन जमीनी हकीकत इन दावों से अलग दिखाई दे रही है। किसानों को पर्याप्त बिजली उपलब्ध कराना सरकार की जिम्मेदारी है। यदि समय पर सिंचाई के लिए बिजली नहीं मिलेगी, तो फसलों की बढ़वार, उत्पादन और किसानों की आर्थिक स्थिति पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है। पहले से ही खेती की बढ़ती लागत और अन्य समस्याओं से जूझ रहे किसानों के लिए बिजली संकट एक अतिरिक्त चुनौती बन गया है।
पटवारी ने कहा कि बिजली की अनियमित आपूर्ति से ग्रामीण क्षेत्रों में सिंचाई के साथ-साथ पेयजल व्यवस्था और अन्य जरूरी कार्य भी प्रभावित हो सकते हैं। वहीं, घरेलू उपभोक्ताओं, छोटे दुकानदारों और कारोबारियों को भी बार-बार बिजली कटौती के कारण परेशानी उठानी पड़ती है। सरकार को यह स्पष्ट करना चाहिए कि किसानों को निर्धारित समय के अनुसार बिजली क्यों नहीं मिल रही है और घरेलू उपभोक्ताओं को अघोषित कटौती से राहत कब मिलेगी। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार की जिम्मेदारी केवल बिजली उत्पादन और आपूर्ति के आंकड़े प्रस्तुत करना नहीं, बल्कि प्रत्येक उपभोक्ता तक जरूरत के मुताबिक नियमित बिजली पहुंचाना भी है। किसानों को 10 घंटे बिजली देने का वादा किया गया है, तो सरकार को बताना चाहिए कि इस वादे को पूरा करने के लिए क्या व्यवस्था की गई है। बिजली संकट के कारणों, आपूर्ति में आ रही बाधाओं और समाधान की समय-सीमा को लेकर सरकार को जनता के सामने स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।
पटवारी ने प्रदेश सरकार से मांग की कि बिजली संकट को गंभीरता से लेते हुए तत्काल प्रभावी कदम उठाए जाएं। जरूरत के अनुसार अतिरिक्त बिजली की व्यवस्था की जाए और उपलब्ध संसाधनों का बेहतर प्रबंधन किया जाए, ताकि किसानों को सिंचाई के लिए निर्धारित समय के मुताबिक बिजली मिल सके। साथ ही, घरेलू उपभोक्ताओं को नियमित बिजली आपूर्ति सुनिश्चित की जाए तथा अनिवार्य परिस्थितियों में होने वाली कटौती की पूर्व सूचना देकर उसके कारणों की जानकारी सार्वजनिक की जाए।
उन्होंने कहा कि किसानों की फसल और आम जनता की दैनिक जरूरतों के साथ किसी भी तरह का समझौता स्वीकार नहीं किया जा सकता। सरकार को केवल घोषणाएं करने के बजाय जमीन पर व्यवस्था सुधारनी होगी। बिजली संकट से प्रभावित क्षेत्रों की समीक्षा कर जवाबदेही तय की जाए और शिकायतों के त्वरित निराकरण के लिए प्रभावी व्यवस्था बनाई जाए। जीतू पटवारी ने मांग की कि भाजपा सरकार किसानों को वादे के मुताबिक प्रतिदिन 10 घंटे बिजली उपलब्ध कराने तथा आम जनता को नियमित घरेलू बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए ठोस कार्ययोजना प्रस्तुत करे। प्रदेश के किसानों को अपनी फसल बचाने के लिए बिजली के इंतजार में संघर्ष न करना पड़े और नागरिकों को अघोषित बिजली कटौती से राहत मिले, यह सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी होनी चाहिए।
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