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भोपाल। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने भोपाल की झील को लेकर बड़ा आदेश दिया है। ट्रिब्यूनल ने भोपाल नगर निगम (बीएमसी), पब्लिक हेल्थ इंजीनियरिंग विभाग (PHE) और वन विभाग को नोटिस जारी कर झील में बिना ट्रीट किए सीवेज का पानी जाने, प्रतिबंधित क्षेत्र में अनधिकृत निर्माण और पेड़ों को नुकसान पहुंचाने के आरोपों पर 4 सप्ताह में रिपोर्ट पेश करने को कहा है।
गुरुवार को रशीद नूर खान द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई के दौरान ट्रिब्यूनल ने यह निर्देश दिए। मामले की अगली सुनवाई 21 दिसंबर को होगी। ट्रिब्यूनल ने स्पष्ट किया है कि प्रतिबंधित क्षेत्र में किसी भी तरह का अनधिकृत निर्माण न हो और वेटलैंड्स (संरक्षण और प्रबंधन) नियम, 2017 का सख्ती से पालन किया जाए।
*अमृत 2.0 से रुकेगा सीवेज - बीएमसी का जवाब*
सुनवाई के दौरान बीएमसी ने ट्रिब्यूनल को बताया कि अमृत 2.0 योजना के तहत सीवेज वाले नालों को रोकने और उनका रास्ता बदलने (डायवर्जन) का काम चल रहा है, जो जल्द ही पूरा हो जाएगा। याचिकाकर्ता ने झील क्षेत्र में चल रहे निर्माण को लेकर आपत्ति जताई थी, जिस पर बीएमसी का कहना था कि जो काम चल रहा है वह नए निर्माण का नहीं, बल्कि पहले से मौजूद ढांचों की मरम्मत का है।
*पेड़ों में केमिकल डालकर सुखाने पर एनजीटी ने लिया संज्ञान*
ट्रिब्यूनल ने पेड़ों के तनों में छेद करके और उन पर केमिकल डालकर उन्हें सुखाए जाने के मामले पर भी गंभीरता से संज्ञान लिया। एनजीटी ने कहा कि पेड़ों की सुरक्षा और उन्हें नुकसान पहुंचाने व अवैध रूप से काटने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जिम्मेदारी वन विभाग, बीएमसी और ट्री ऑफिसर की है।
ट्रिब्यूनल ने वन विभाग और बीएमसी को चार सप्ताह में विस्तृत रिपोर्ट देने के निर्देश दिए हैं। दोनों विभागों को पेड़ों को हुए नुकसान, पेड़ काटने के लिए दी गई अनुमति और उसके एवज में किए गए क्षतिपूर्ति पौधरोपण का पूरा ब्यौरा देना होगा। जिन विभागों ने पहले आदेश के बावजूद रिपोर्ट जमा नहीं की है, उन्हें भी तय समय सीमा में रिपोर्ट पेश करने को कहा गया है।
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