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नई दिल्ली। भारत और न्यूजीलैंड के बीच मुक्त व्यापार समझौता 20 अक्टूबर विजयादशमी से लागू हो रहा है। वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल और न्यूजीलैंड के व्यापार मंत्री टॉड मैक्ले ने वर्चुअल बैठक में इसकी घोषणा की।
गोयल ने कहा कि मैदान के अंदर और बाहर दोनों जगह भारत-न्यूजीलैंड की विजयी साझेदारी है। न्यूजीलैंड के बाजार में 100 प्रतिशत शुल्क मुक्त पहुंच से एमएसएमई, कारीगर, किसान और महिला उद्यमियों के लिए नए अवसर खुलेंगे।
टॉड मैक्ले ने कहा कि यह समझौता दोनों देशों के संबंधों में बड़ा मोड़ है। यह 1.4 अरब उपभोक्ताओं वाले भारत के बाजार का दरवाजा खोलेगा।
मुख्य बिंदु जो नई खबर में जुड़े हैं
पहली खेप को हरी झंडी: समझौता लागू होने के दिन भारत से न्यूजीलैंड के लिए पहली बार जेसीबी मशीन के निर्यात को हरी झंडी दिखाई गई। इसके साथ ही कृषि, रत्न-आभूषण, इंजीनियरिंग, खेल का सामान, जूते और चमड़ा सेक्टर के उत्पादों की भी पहली खेप भेजी जाएगी।
जीरो ड्यूटी का दायरा: न्यूजीलैंड ने भारतीय निर्यात को कवर करने वाली सभी टैरिफ लाइनों पर ड्यूटी खत्म कर दी है। कपड़ा, परिधान, चमड़ा, जूते, जेम्स एंड ज्वेलरी, इंजीनियरिंग, ऑटोमोबाइल, केमिकल, फार्मा, कृषि और प्रोसेस्ड फूड को सीधा लाभ होगा।
सर्विस सेक्टर में बड़ी छूट: न्यूजीलैंड ने अपने किसी भी एफटीए में अब तक का सबसे बेहतर सेवा प्रस्ताव भारत को दिया है। 118 सेक्टर में बाजार पहुंच और 139 सब सेक्टर में एमएफएन प्रतिबद्धता दी है। पहली बार आयुर्वेद, योग और आयुष प्रणालियों को शामिल किया गया है। औषधि और मेडिकल उपकरण के लिए नियम सरल किए गए हैं।
कृषि उत्पादकता साझेदारी: यह समझौते का प्रमुख हिस्सा है। सेब, कीवी और शहद के लिए एक्शन प्लान बने हैं। नागालैंड के फुत्सेरो और उत्तराखंड के माग्रा में कीवी के सेंटर की पहचान हो चुकी है। हिमाचल और उत्तराखंड में सेब और उत्तर प्रदेश व पश्चिम बंगाल में शहद के सेंटर प्रस्तावित हैं। हिमाचल, नागालैंड, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश और अरुणाचल के प्रतिनिधि कार्यक्रम में मौजूद रहे।
किसानों की सुरक्षा: डेयरी, चीनी, खाद्य तेल और प्रमुख कृषि जिंसों को रियायत से बाहर रखा गया है। मजबूत रूल्स ऑफ ओरिजिन और एंटी-सर्कुलेशन प्रावधान से फर्जी निर्यात पर रोक लगेगी।
भौगोलिक संकेतक को संरक्षण: न्यूजीलैंड ने भारतीय जीआई उत्पादों के पंजीकरण में मदद का वादा किया है ताकि ग्रामीण कारीगरों के उत्पादों को सुरक्षा मिले।
20 अरब डॉलर निवेश और व्यापार लक्ष्य: न्यूजीलैंड ने भारत में 20 अरब डॉलर निवेश सुगम बनाने की प्रतिबद्धता जताई है। वार्ता 16 मार्च 2025 को शुरू होकर 22 दिसंबर 2025 को पूरी हुई थी और 27 अप्रैल 2026 को हस्ताक्षर हुए। दोनों देशों ने 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को दोगुना कर 7 अरब न्यूजीलैंड डॉलर यानी 35 हजार करोड़ रुपये करने का रोडमैप बनाया है।
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