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मप्र के पीथमपुर में आज से ही शुरू होगी यूनियन कार्बाइड का जहरीला कचरा जलाने की प्रक्रिया
bhopal,  burning toxic waste  , Madhya Pradesh
भोपाल/धार। प्रदेश की राजधानी भोपाल से यूनियन कार्बाइड फैक्टरी में पिछले 40 से डम्प पड़ा 337 टन जहरीला कचरा लेकर 12 कंटेनर गुरुवार अल सुबह पीथमपुर की रामकी कंपनी पहुंच गए हैं। इसके साथ ही इस जहरीले कचरे को जलाने की प्रक्रिया भी आज से शुरू की जा रही है। वहीं, स्थानीय लोग पीथमपुर बस स्टैंड पर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। स्थानीय लोगों के विरोध के चलते यहां कड़े सुरक्षा इंतजाम किए गए हैं और कचरे को जलाने की प्रक्रिया वैज्ञानिक तरीके से अंजाम दी जा रही है।
 
इधर, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने पीथमपुर में यूनियन कार्बाइड का जहरीला कचरा जलाए जाने को लेकर गुरुवार को मीडिया से बात करते हुए कहा कि रासायनिक कचरे का निष्पादन विज्ञानियों से ही कराया जा रहा है। इसमें सभी मानकों का पालन हो रहा है। जनप्रतिनिधियों के साथ आज तीन बजे प्रभारी मंत्री कैलाश विजयवर्गीय बैठक करेंगे और सभी शंकाओं का समाधान करेंगे। कचरा जलाने से न तो पर्यावरण कोई कोई नुकसान होगा और न ही भूजल प्रभावित होगा। समस्त अध्ययन के बाद ही कार्रवाई की जा रही है।
 
मुख्यमंत्री ने कांग्रेस द्वारा उठाई जा रही आपत्तियों पर कहा कि उसके नेता पीथमपुर को लेकर आवाज उठा रहे हैं लेकिन उन्हाेंने भोपाल को लेकर अभी तक कोई बात नहीं की।दोमुंही है कांग्रेसी इसकाे लेकर राजनीति करते हैं लेकिन यह राजनीति का विषय नहीं है। भोपालवासी 40 वर्ष से इस कचरे के साथ जी रहे थे। हम सुप्रीम कोर्ट के आदेश का पालन कर रहे हैं। जिस कचरे को हम पीथमपुर में जलाने जा रहे हैं, उसका पहले भी ड्राई रन कर चुके हैं। इसकी रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट में जमा की थी, उसी रिपोर्ट के आधार पर सुप्रीम कोर्ट ने इस कचरे को नष्ट करने के निर्देश हमें दिए थे। इसमें यह साफ कर दिया गया था कि इस कचरे के जलने से पर्यावरण पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।
 
उन्होंने कहा कि अगस्त 2015 में यूनियन कार्बाइड का कचरा जलाने का ट्रायल रन किया गया था। परीक्षण में जो रिपोर्ट आई है उसके मुताबिक कचरा जलाने से वातावरण में किसी तरह का कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। इस रिपोर्ट के बाद हाई कोर्ट ने हमें कचरा जलाने के लिए निर्देशित किया है। परीक्षण के तौर पर पहले 90 किलोग्राम, 180 किलोग्राम और फिर 270 किलोग्राम कचरे को भस्मक में जलाकर देखा जाएगा। इस दौरान विज्ञानियों द्वारा जो मात्रा उचित निष्पादन के लिए मान्य होगी, उसी के आधार पर इसे जलाने की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी। इस पूरी प्रक्रिया में करीब तीन दिन का समय लगेगा।
 
गाैरतलब है कि भोपाल से यूनियन कार्बाइड का जहरीला कचरा 250 किमी का ग्रीन कॉरीडोर बनाकर लाया गया। भोपाल से बुधवार की रात करीब नौ बजे कंटेनर पीथमपुर के लिए रवाना किए गए थे। पूरे रास्ते में जगह-जगह पुलिस तैनात रही। जहरीले कचरे से भरे 12 कंटनरों के साथ फायर ब्रिगेड, एंबुलेंस और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड सहित पुलिस के वाहन भी चल रहे थे। इस तरह कुल 18 गाड़ियां चल रही थीं।
 
इधर, पीथमपुर के रामकी कंपनी में यूनियन कार्बाइड का कचरा जलाने का लगातार विरोध चल रहा है। करीब 40 युवक फिर से अनिश्चितकालीन धरने पर बैठ गए हैं। वहीं, स्थानीय नेता तीन जनवरी के बंद के समर्थन के लिए घर-घर जाकर लोगों को इसमें शामिल होने के लिए अपील करेंगे। आज शहर में इसके विरोध में रैली भी निकाली जाएगी। शुक्रवार को शहर बंद रखने की अपील की गई है। वहीं, पीथमपुर बचाओ समिति दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रही है। विरोध करने वालों का कहना है कि जहरीला कचरा जलाए जाने से शहर के लोगों पर इसका बुरा प्रभाव पड़ेगा।
 
दिल्ली में प्रदर्शन कर रहे पीथमपुर बचाओ समिति के अध्यक्ष डॉ. हेमंत हिरोले का कहना है कि यूनियन कार्बाइड का जहरीला कचरा मप्र सरकार पीथमपुर के औद्योगिक क्षेत्र में डंप कर नष्ट करना चाहती है। जहरीला कचरा पीथमपुर के रामकी प्लांट में जलाने योग्य नहीं है। रामकी में 14 लाख टन कचरा डंप करने की क्षमता थी, लेकिन आज तक 13 लाख टन कचरा रामकी प्लांट में डंप हो चुका है। इंसुलेटर में बहुत सारी खामियां हैं। इसे लेकर सुप्रीम कोर्ट, पूर्व केंद्रीय मंत्री जयराम रमेश, मप्र के पूर्व मंत्री जयंत मलैया और बाबू गौड़ ने यह बात कही थी कि यह प्लांट उस योग्य नहीं है। उन्होंने कहा कि 2014 के बाद 2024 में ऐसा क्या हुआ कि अचानक पीथमपुर में जहरीला कचरा डंप करने की जरूरत पड़ी पड़ रही है। अगर, यह कचरा पीथमपुर में नष्ट किया जाता है, तो 1984 का मंजर फिर से देखने को मिलेगा। इस जहरीले कचरे से आने वाली फसलें और नस्लें जरूर खराब हो जाएंगी।
 
इस संबंध में गैस राहत एवं पुनर्वास विभाग विभाग के संचालक स्वतंत्र कुमार सिंह का कहना है कि पीथमपुर रामकी कंपनी में अतिसुरक्षित साइट पर कचरे को जमीन व पानी से दूर ऊंचाई पर रखा जाएगा। यहां विज्ञानियों द्वारा इसका अलग-अलग भार में परीक्षण किया जाएगा। इसके बाद जल्द ही इसके निष्पादन की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी।
MadhyaBharat 2 January 2025

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