Since: 23-09-2009

  Latest News :
आरएसएस प्रमुख किसी जाति का नहीं होगा, केवल हिंदू होना जरूरी: मोहन भागवत.   अमेरिका ने भारत को दिया पैक्स सिलिका पहल में शामिल होने का न्योता, रणनीतिक रिश्ते होंगे और मजबूत.   कांग्रेस MLA गणेश घोघरा का बड़ा आरोप, मंत्री के बेटे के नाम 52 बीघा जमीन घोटाले का दावा.   सोनिया गांधी ने कोर्ट में दाखिल किया जवाब, जानिए वोटर लिस्ट विवाद का पूरा मामला.   Ritu Tawde होंगी BJP की मेयर उम्मीदवार, डिप्टी मेयर पद शिवसेना के खाते में.   एअर इंडिया और इंडिगो के विमानों में बार-बार तकनीकी खराबी.   शिवराज बोले- भारत-अमेरिका ट्रेड डील में किसानों के हित पूरी तरह सुरक्षित.   इंदौर में ‘यूथ वॉक-2026’: हजारों युवाओं ने नशे के खिलाफ लिया संकल्प.   एमपी की बिटिया ने रचा इतिहास, माउंट किलिमंजारो पर फहराया तिरंगा.   एमपी में आज 9 राज्यों के कृषि मंत्री, किसानों को मिलेगी बड़ी सौगात.   टैक्स स्लैब समय पर बदले होते तो भारत चीन-अमेरिका से आगे होता: भाजपा प्रदेशाध्यक्ष.   मध्य प्रदेश में ग्राम पंचायत स्तर तक पहुंचेगा एमएसएमई.   दीपका माइंस में ट्रेलर में आग, कोयला न होने से बड़ा नुकसान टला.   केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह छत्तीसगढ़ दौरे पर, 51 नक्सलियों का हुआ सरेंडर.   छत्तीसगढ़ में मौसम स्थिर, ठंड का असर जारी; दो दिन बाद बढ़ेगा रात का तापमान.   WhatsApp पर ठगी का नया जाल, फर्जी लिंक क्लिक करते ही कर्मचारी के खाते से 5 लाख उड़ाए.   फर्जी दस्तावेजों के सहारे शिक्षा विभाग में नौकरी, 8 आरोपियों पर एफआईआर से हड़कंप.   नए मास्टर प्लान से बदलेगी बालोद की तस्वीर: 10 गांव होंगे शामिल.  
विचाराधीन कैदियों को राहत देने के लिए केंद्र ने राज्यों को लिखा पत्र
new delhi,Center wrote a letter, undertrial prisoners

नई दिल्ली । केंद्रीय गृह मंत्रालय ने सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 (बीएनएसएस) की धारा 479 का पालन करने का निर्देश दिया है। इसके तहत विचाराधीन कैदियों को राहत दी जा सकती है। जिसका उद्देश्य मुकदमे की प्रतीक्षा के दौरान जेल में बंद लोगों की संख्या को कम करना है।

 
इस संबंध में केन्द्रीय गृह मंत्रालय ने 1 जनवरी को राज्यों के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ जेल अधिकारियों को एक पत्र भेजा है। इस पत्र में उन्हें भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) 2023 की धारा 479 का पालन करने के लिए कहा है। इस धारा के तहत ऐसे विचाराधीन कैदियों को रिहा किया जाता है, जिन्होंने अपनी संभावित सजा का एक हिस्सा पूरा कर लिया है। पहली बार अपराध करने वाले कैदियों को उनकी अधिकतम संभावित सजा का एक तिहाई हिस्सा पूरा करने के बाद जमानत पर रिहा किया जा सकता है। अन्य विचाराधीन कैदी अपनी संभावित अधिकतम सजा का आधा हिस्सा पूरा करने के बाद जमानत के पात्र हैं।
 
मंत्रालय ने अपने पत्र में कहा, "यह दोहराया जाता है कि बीएनएसएस की धारा 479 के प्रावधान विचाराधीन कैदियों की लंबी हिरासत काे कम करने और जेलों में भीड़भाड़ के मुद्दे को भी हल कर सकते हैं। इसलिए, यह उम्मीद की जाती है कि सभी राज्य और केंद्र शासित प्रदेश इस मामले में सहयोग करेंगे और संबंधित जेल अधिकारियों को मामले में आवश्यक कार्रवाई करने और गृह मंत्रालय को वांछित जानकारी देने के लिए सलाह देंगे।"
 
उल्लेखनीय है कि यह पहली बार नहीं है जब सरकार ने इस कानून के क्रियान्वयन पर जोर दिया है। पिछले साल अक्टूबर को एक एडवाइजरी जारी की गई थी और नवंबर में एक विशेष अभियान शुरू किया गया था। 
इस कानून में यह भी प्रावधान है कि जेल अधीक्षक पात्र कैदियों की रिहाई के लिए काेर्ट में आवेदन कर सकते हैं। केंद्र सरकार 1 जनवरी से इस कानून के क्रियान्वयन पर अपडेट चाहती है। उन्होंने पात्र कैदियों की संख्या, दायर किए गए आवेदनों और दी गई रिहाई के बारे में डेटा मांगा है। मंत्रालय का मानना है कि यह कानून जेलों में लंबे समय तक हिरासत और भीड़भाड़ को काफी हद तक कम कर सकता है।
 
MadhyaBharat 7 January 2025

Comments

Be First To Comment....
Video

Page Views

  • Last day : 8641
  • Last 7 days : 45219
  • Last 30 days : 64212


x
This website is using cookies. More info. Accept
All Rights Reserved ©2026 MadhyaBharat News.