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बंगाल में जेएमबी की स्लीपर सेल साजिश का खुलासा
kolkata, JMB
कोलकाता । पश्चिम बंगाल पुलिस ने आतंकवादी संगठन जमात-उल-मुजाहिदीन बांग्लादेश (जेएमबी) द्वारा किए जा रहे बड़े षड्यंत्र का खुलासा किया है। पता चला है कि राज्य के विभिन्न हिस्सों में कई युवाओं, जिनमें कुछ नाबालिग भी हैं, को जेएमबी की स्लीपर सेल में शामिल करने के लिए प्रयास किए जा रहे थे।
 
एक पुलिस अधिकारी के मुताबिक बीते दिनों विशेष कार्य बल (एसटीएफ) नेअबासुद्दीन मोल्ला,आज़मल हुसैन और साहेब अली खान को गिरफ्तार किया गया था। इन आरोपियों से पूछताछ में खुलासा हुआ कि इन्होंने युवाओं से व्यक्तिगत रूप से संपर्क कर ‘मजहबी शिक्षा कार्यक्रमों’ में शामिल होने के लिए प्रेरित किया। इन कार्यक्रमों के जरिए युवाओं को इस्लामिक कट्टरपंथ की ओर धीरे-धीरे मोड़ा जाता था। उन्हें ऐसे वीडियो और किताबें दी जाती थीं जो सतही तौर पर मजहबी प्रतीत होती थीं, लेकिन उनके भीतर ‘जिहाद’ का संदेश छिपा होता था। पहले चरण में इन युवाओं में से उन्हीं को चुना जाता था जो संगठन के 'दीर्घकालिक लक्ष्य' के प्रति पूरी निष्ठा और प्रतिबद्धता दिखाते थे। चयन के बाद इन युवाओं का ब्रेनवॉश और गहराई से किया जाता था।
 
पाकिस्तान और कश्मीर कनेक्शन
 
एसटीएफ द्वारा की गई अभी तक की जांच में आरोपित अबासुद्दीन मोल्ला के पाकिस्तान से सीधे संपर्क के प्रमाण मिले हैं। उसके मोबाइल फोन से बरामद एन्क्रिप्टेड मैसेज में पाकिस्तान में स्थित कुछ लोगों के साथ साथ कश्मीर आधारित कट्टरपंथी संगठन अंसार गजवत-उल-हिंद के संपर्क की पुष्टि हुई है। वहीं अन्य दो आरोपित आज़मल हुसैन और साहेब अली खान के मोबाइल से मिले संदेशों से जेएमबी के अलावा बांग्लादेशी संगठन हिज्ब-उत-तहरीर (एचयूटी) और अंसारुल्लाह बांग्ला टीम (एबीटी) से संबंधों का संकेत भी मिला है। आज़मल और साहेब को बीरभूम ज़िले से पकड़ा गया था, जबकि मोल्ला की गिरफ्तारी दक्षिण-24 परगना के डामंड हार्बर के पाटुरी गांव से हुई थी।
 

मुर्शिदाबाद हिंसा में एबीटी की भूमिका संदिग्ध
 
हाल ही में मुर्शिदाबाद ज़िले में वक्फ (संशोधन) अधिनियम के खिलाफ हुए हिंसक प्रदर्शन में भी खुफिया एजेंसियों को बांग्लादेशी घुसपैठियों की भूमिका के इनपुट मिले थे। इन रिपोर्टों में जेएमबी, एचयूटी और एबीटी जैसे संगठनों का नाम सामने आया है। खासकर सीमावर्ती क्षेत्रों, शमशेरगंज और धूलियान में हुई हिंसा के पीछे एबीटी की भूमिका की आशंका मानी जा रही है। शमशेरगंज के पूर्व में ही बांग्लादेश का चापाई नवाबगंज ज़िला स्थित है जो एबीटी का गढ़ माना जाता है।
 
पुलिस प्रवक्ता के मुताबिक राज्य पुलिस और केंद्रीय खुफिया एजेंसियों ने अलर्ट जारी कर दिया है। नाबालिगों और युवाओं को जेहादी गतिविधियों में शामिल करने की यह रणनीति राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा मानी जा रही हैं। पूछताछ और डिजिटल सबूतों के आधार पर अब इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की पहचान और गिरफ्तारी के प्रयास जारी हैं।

 

MadhyaBharat 26 May 2025

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