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भारतीय सेना ने ​खरीदे 450 नागास्त्र 'आ​त्मघाती ड्रोन'
new delhi, Indian Army , Nagastra

नई दिल्ली । ​भारतीय सेना ​450 ​नागास्त्र-1आर ​लोइटरिंग युद्ध सामग्री का ऑर्डर देकर अपनी सटीक हमला क्षमताओं को बढ़ा रही है। ​जीपीएस​ से लैस इन स्वदेशी 'आ​त्मघाती ड्रोन' में ​​सटीकता​ के साथ हमले करने की क्षमता, उच्च ऊंचाई पर संचालन और दिन-रात निगरानी की सुविधा है। ​दुश्मन के ठिकानों पर सटीक हमलों के लिए डि​जाइन​ किया गया यह हथियार देश के सैन्य ढांचे को और मजबूत करेगा। ​इस सिस्टम का परीक्षण लद्दाख और उत्तर प्रदेश में झांसी के पास बबीना सहित विभिन्न स्थानों पर किया गया है। आने वाले समय में ऐसे और भी अत्याधुनिक स्वदेशी हथियार सेना को मिल सकते हैं।

​नागपुर की सोलर डिफेंस एंड एयरोस्पेस लिमिटेड​ में निर्मित अत्याधुनिक ​लोइटरिंग म्यूनिशन ​नागास्त्र-1आर की पहली खेप हासिल करने के बाद भारतीय सेना ने उपयोग किया है। ​इस हथियार ​की बढ़ती जरूरतों को देखते हुए ​अब सेना ने अपनी सटीक हमला क्षमताओं को बढ़ाने, अपनी पैदल सेना को आधुनिक बनाने के लिए 450 नागास्त्र-1आर लोइटरिंग युद्ध सामग्री का ऑर्डर दिया है।​ ​यह एक किफायती सिस्टम है​, जिसमें लॉन्चर सिस्टम की पूरी तरह से दोबारा इस्तेमाल की जा सकने वाली खूबि​यां हैं। ​इस सिस्टम में 360 डिग्री का जिम्बल कैमरा ​लगा है​ और रात ​में ऑपरेशन ​करने के लिए थर्मल कैमरा लगाने का विकल्प भी है​। ​

सोलर डिफेंस एंड एयरोस्पेस लिमिटेड​ में निर्मित ​लोइटरिंग म्यूनिशन सिस्टम ​में 80 फीसदी से ज्यादा स्वदेशी सामग्री का इस्तेमाल हुआ है। ​इसे आम भाषा में 'घूमकर​ हमला करने वाला हथियार' कहा जा सकता है​, क्योंकि यह एक तरह से हवाई एंबुश यानी घात लगाकर हमला करता है। दुश्मन के इलाके में उड़कर पहुंचने के बाद यह लक्ष्य के ऊपर हवा में मंडराता है और जैसे ही सही मौका मिलता है, यह सटीक निशाना लगाकर दुश्मन को खत्म कर सकता है। खास बात यह है कि अगर हमला रद्द करना हो तो इसे वापस भी बुलाया जा सकता है, जिससे यह दोबारा इस्तेमाल किया जा सकता है।

​कंपनी के मुताबिक ​नागास्त्र-1आर को इस तरह से डिजाइन किया गया है कि यह दुश्मन ​के ​राडार ​की पकड़ में नहीं आता है। यह 4,500 मीटर से ज्यादा ऊंचाई ​से दुश्मन पर नजर रख सकता है। इसकी यह खूबी इसे दुश्मन के इलाके में गुपचुप पहुंचने और वहां से सुरक्षित हमले करने में मदद करती है। खासतौर पर आतंकवादियों के काफिले पर इसका इस्तेमाल कारगर हो सकता है। इसकी एंड्योरेंस यानी हवा में लगातार बने रहने की क्षमता 60 मिनट तक की है। यानी यह एक घंटे तक दुश्मन के इलाके में मंडरा सकता है और मौका ​मिलते ही हमला कर सकता है।​

MadhyaBharat 23 June 2025

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