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उल्लेखनीय है कि, भानुप्रतापपुर ब्लॉक के अंतर्गत ग्राम कुडाल में ग्रामीणों ने एक अनोखी पहल की शुरूआत की जिसमें गांव के चारों ओर एक एक बोर्ड लगाया गया है जिसमें पास्टर और पादरी को गांव में घुसने पर पूर्ण प्रतिबंध है। साथ ही बोर्ड बकायदा संविधान की अनुरूप नियम कायदा भी लिखा गया है। इस तरह की पहल करने वाला कांकेर जिला में पहला गांव ग्राम कुडाल में लगभग 9 धर्मांतरित परिवार है। 10 दिन पहले धर्मांतरित परिवार के एक महिला की मृत्यु होने के बाद कफन दफन को लेकर गांव में बवाल हुआ था जिसके बाद ग्राम सभा में प्रस्ताव पारित कर पास्टर पादरी को गांव में आने से सख्त मना किया गया है। इस तरह की पहल करने वाला कांकेर जिले में पहला गांव ग्राम कुडाल में लगभग 9 धर्मांतरित परिवार है। 10 दिन पहले धर्मांतरित परिवार के एक महिला की मृत्यु होने के बाद कफन दफन को लेकर गांव में बवाल हुआ था जिसके बाद ग्राम सभा में प्रस्ताव पारित कर पास्टर पादरी को गांव में आने से सख्त मना किया गया है। इसके बाद यह सिलसिला अन्य ग्रामाें में भी दिखने लगा है, इसी कड़ी में भानुप्रतापपुर ब्लॉक के ग्राम घोटिया में आदिवासी समाज ने भी ईसाई पादरियों एवं धर्मांतरित व्यक्तियों के ग्राम घोटिया में प्रवेश पर रोक लगा दी है।
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