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एक साथ चुनाव से खर्च भी बचेगा और सरकारें साढ़े चार साल जनता की सेवा में जुटी रहेंगीः शिवरा
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भोपाल । केन्द्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि बार-बार चुनाव होते हैं तो लोकसभा, विधानसभा चुनाव में साढे़ चार लाख करोड़ रुपये खजाने से खर्च होता है। ये तो बजट के माध्यम से खर्च होता है, लेकिन पोस्टर, बैनर, सभाएं, हेलिकॉप्टर, गाड़ी, और फिर पैसा चंदा होता है। लाओ चंदा, देश भर से चंदा उगाही चलती है। राजनीतिक दल अलग खर्चा करते हैं। ऐसे में पैसा कहां से आएगा, एकत्र ही किया जाएगा। दूसरी तरफ जब बार-बार चुनाव होते हैं तो बडे़ नीतिगत फैसले नहीं हो पाते। कोई भी दल को जब लगता है कि छह महीने में चुनाव हैं तो देश की प्रगति और विकास के लिए कड़ा और बड़ा फैसला लेना हो तो सब ड़र जाते हैं। मत करो, बिहार में चुनाव है वोट न कट जाएं। जो चल रहा है चलने दो। अगर एक साथ लोकसभा और विधानसभा के चुनाव होंगे, तो खर्च भी बचेगा और सरकारें साढ़े चार साल जनता की सेवा में जुटी रहेंगी।


दरअसल केन्द्रीय मंत्री चौहान शुक्रवार को मप्र की राजधानी भोपाल के एसआईआरटी में वन नेशन-वन इलेक्शन पर आयोजित कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। केंद्रीय कृषि मंत्री कार्यक्रम में पहुंचे तो छात्रों ने खड़े होकर उनका तालियों से स्वागत किया और मामा-मामा के नारे लगाए। इस दौरान शिवराज सिंह चौहान ने बच्चों को संबोधित करते हुए कहा कि वैसे भी यहां कौन सा मंत्री आया है। मंत्री तो आते और जाते रहते हैं मामा परमानेंट है। इसलिए यहां मामा ही आया है। कार्यक्रम में उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश और मप्र भाजपा की वन नेशन-वन इलेक्शन के प्रदेश संयोजक रोहित आर्या, सेज ग्रुप के डायरेक्टर संजीव अग्रवाल, युवा मोर्चा के प्रदेश उपाध्यक्ष रंजीत सिंह चौहान मौजूद थे।


केन्द्रीय मंत्री चौहान ने कहा कि जब चुनाव होता है तो मुद्दा ढूंढते हैं और मुद्दा क्या ढूंढते हैं जातिवाद, भाषावाद, वैसे तो जाति का पता नहीं चलता, लेकिन जब चुनाव आता है तो जाति, उसकी उपजाति। हमें तो इतने टिकट दो, हमारी संख्या तो इतनी संख्या है। इन सब समस्याओं का एक ही उपाय है संविधान में संशोधन करके लोकसभा और विधानसभा के चुनाव 5 साल में एक बार कराए जाएं।


उन्होंने कहा कि लॉन्ग टर्म में देश की भलाई के जो फैसले होते हैं वो फैसला कोई राजनीतिक दल नहीं लेता। कई बार जनता को लुभाने के लिए फैसले लिए जाते हैं। एक पार्टी कहती है मैं तुम्हारे लिए आसमान के तारे तोड़कर ला दूंगा। दूसरी पार्टी कहती है मैं तारे तोड़कर नहीं लाऊंगा तुम्हारी जेब में ही रख दूंगा। होड लगती है। ये सोचते हैं कि कैसे चुनाव जीतूं? चुनाव में अकेले पुलिस वालों की ड्यूटी नहीं लगती। वोटर लिस्ट बनना है तो कलेक्टर कहते हैं कि शिक्षको आ जाओ, आंगनवाड़ी कार्यकर्ता, मास्टर, डॉक्टर सब वोटर लिस्ट बनाने में लग जाते हैं। अफसर काम नहीं करते, मास्टर पढ़ाते नहीं। चारों तरफ केवल चुनाव ही चलता है।


केन्द्रीय कृषि मंत्री ने कहा कि भारत अत्यंत और प्राचीन महान राष्ट्र है। एक जमाना था जब दुनिया में अज्ञान का अंधकार था। तब हमारे यहां नालंदा और तक्षशिला जैसे विश्वविद्यालय थे। जब विकसित राष्ट्र कहलाने वाले देशों के लोग अपने शरीर को पेड़ के पत्तों और छाल से ढंका करते थे। तब हमारे यहां सिल्क और मलमल बन चुका था। उन्होंने कहा कि आजकल जिन परमाणु अस्त्रों की बात हम सुनते हैं, महाभारत में पढ़ो तो ब्रह्मास्त्र, अग्नेयास्त्र, वरुणास्त्र अगर सुदर्शन चक्र निकलकर उंगली से जाता था तो गर्दन काटकर वापस आ जाता था। हमारे धर्नुधर ऐसे थे कि तीर चलाते थे वो लक्ष्य भेदता था और लौटकर आ जाता था। पुष्पक विमान कब बना? भगवान राम लंका के पुष्पक विमान में बैठकर अयोध्या आए थे। राइट बंधुओं ने तो 1919 में हवाई जहाज बनाया लेकिन हमारे भारत का विज्ञान बहुत उन्नत था। लेकिन बीच में मुगलों और अंग्रेजों की गुलामी के कारण भारत बहुत पीछे चला गया। आज प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारत तेजी से आगे बढ़ रहा है।


केन्द्रीय मंत्री चौहान ने कहा कि अपने देश में कुछ हो न हो लेकिन पांचों साल, 12 महीने 365 दिन नेता चुनाव की तैयारी में लगे रहते हैं। एक चुनाव खत्म नहीं हुआ दूसरा चुनाव आ जाता है। पौने दो साल पहले एमपी, छत्तीसगढ़ राजस्थान के चुनाव हुए उस समय मैं मुख्यमंत्री था जनवरी से सब काम बंद हो गए और चुनाव की तैयारी शुरु हो गई। फिर आचार संहिता लग गई। वो चुनाव हुए उसके बाद लोकसभा चुनाव की आचार संहिता लग गई। अब कोई काम नहीं हो सकता। लोकसभा के बाद हरियाणा, जम्मू कश्मीर, झारखंड, महाराष्ट्र के चुनाव आ गए, वो खत्म नहीं हुए दिल्ली का दंगल शुरु हो गया। अब बिहार में चुनाव शुरु हो गया। बिहार में खत्म होंगे तो बंगाल में चुनाव होंगे। अपने देश में हमेशा 12 महीने और कोई काम हो न हो चुनाव की तैयारी चलती रहती है।


उन्होंने कहा कि हमेशा जब चुनाव होता है तो राजनीतिक दलों का दिमाग केवल चुनाव जीतने में लगा रहता है। मैं भारत का कृषि मंत्री बना लेकिन मैं महाराष्ट्र, झारखंड के चुनाव में लगा रहा। तो मैं खेती-बाड़ी का काम नहीं कर पाया। पार्टी ने आदेश दिया कि चुनाव में जाओ तो मामा तीन महीने कहते रहे कमल के फूल का बटन दबाओ। प्रधानमंत्री से लेकर राज्यों के मुख्यमंत्री, मंत्री सांसद विधायक और केवल नेता ही नहीं लगते। अफसरों की भी ड्यूटी लगती है। पुलिस फिर चोरों को नहीं पकड़ती चुनाव की व्यवस्था में लगती है। विकास के सारे काम ठप हो जाते हैं। अफसरों को बहाना हो जाता है अभी कुछ नहीं हो सकता है अभी तो चुनाव चल रहे हैं। हम लोगों का जो समय देश की प्रगति और विकास में लग सकता है वो केवल चुनाव के प्रचार में लग जाता है।

 

MadhyaBharat 11 October 2025

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