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मोंथा का असर से हो रही बारिश
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अनूपपुर । मध्य प्रदेश के अनूपपुर जिले में चक्रवाती तूफान मोंथा के असर से पहाड़ी क्षेत्र खासकर राजेंद्रग्राम और अमरकंटक में घना कोहरा बना हुआ है, जिससे लोगों को वाहन चलाने में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। रात्रि में तेज हवा और बारिश से धान की फसल गिरकर पानी में भीग गई है।


ग्रामीण अंचलों में बीते 5 दिनों से लगातार हो रही बारिश ने किसानों की साल भर की मेहनत पर पानी फेर दिया है। खेतों में जगह-जगह पानी भर जाने न से धान की लगभग आधी फसल पूरी तरह खराब हो न चुकी है, जबकि सोयाबीन की फसल लगभग समाप्त मानी जा रही है। प्रतिदिन रुक-रुककर हो रही बारिश के कारण किसानों में मायूसी ला दी है। अनूपपुर के ग्राम परसवार, मौहरी, पिपरिया, जमुडी सकरा, दुलहरा सहित जैतहरी, कोतमा, पुष्पराजगढ़ क्षेत्र के खेतों में पानी भर गया है। खेतों में धान की फसल पानी में डूबने से बाली में सड़न आने लगी है। किसान अब खेतों में फसल बचाने का कोई रास्ता नहीं दिख रहा है। गत दिनों आई तेज आंधी और पानी ने पहले ही चान और सोयाबीन की फसल को आधे नुकसान में पहुंचा दिया था, उसके बाद 28 अक्टूबर की बारिश ने पूरी तरह से फसल को चौपट कर दिया। जिसके बाद से लगातार रूक-रूककर बारिश हो रही है जिससे सोयबीन की फसल तो पूरी तरह बर्बाद हो चुकी है और धान की फसल पूरी तरह खराब होने के अंतिम चरण में चल रहा है। गुरूवार की रात्रि तेज आंधी और बारिश ने बची कुची कसर को पूर कर दिया। शुक्रवार को भी बादलों ने डेरा डाला हुआ है।


किसानों की नाराजगी  
लगातार बारिश से हुए नुकसान के बाद भी बीमा कंपनी, राजस्व विभाग और कृषि विभाग की टीमों द्वारा अब तक किसी भी तरह का सर्वे नहीं किया गया है। किसानों का कहना है कि जब तक नुकसान का आंकलन नहीं होगा, तब तक उन्हें बीमा क्लेम का लाभ नहीं मिल पाएगा। किसान सीताराम पटेल कहते हैं कि हर साल हम बीमा का प्रीमियम भरते हैं लेकिन जब नुकसान होता है तो कोई अधिकारी देखने तक नहीं आता। अधिकारी कागजों में सर्वे कर लेते हैं और वास्तविक किसान को कुछ नहीं मिलता। ग्रामीण इलाकों में यह चर्चा आम है कि विभागीय लापरवाही के कारण किसान न तो समय पर मुआवजा पा रहे हैं और न ही कृषि ऋण माफी जैसी योजनाओं का लाभ। ग्राम पंचायत स्तर पर किसान लगातार मांग कर रहे हैं कि प्रशासन तत्काल नुकसान का सर्वे कराए ताकि वास्तविक हकदारों को राहत मिल सके। कृषि विभाग की ओर से किसानों को फसल सुरक्षा, वैकल्पिक खेती और जल निकासी व्यवस्था के बारे में कोई ठोस दिशा-निर्देश नहीं दिए गए हैं।


कागजों में मिल रहा फसल बीमा का फायदा
प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत किसानों को प्राकृतिक आपदा से सुरक्षा देने का दावा किया गया था, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही है। जिले में हजारों किसान इस योजना में पंजीकृत है फिर भी वास्तविक क्लेम का भुगतान बहुत कम किसानों को मिल पाता है। किसानों का आरोप है कि बीमा कंपनी केवल दस्तावेजी कार्रवाई कर पैसा वसूलती है, लेकिन जब खेतों में नुकसान होता है तो सर्वे टीम भेजने में महीनों लगा देती है।

 

फसलों के सर्वे का निर्देश
जिले में लगातार बारिश के कारण जिलेभर के अधिकांश क्षेत्रों में फैसले बर्बाद हो गई हैं। जिससे किसानों को काफी नुकशान का अनुमान हैं। कलेक्टर हर्षल पंचोली ने शुक्रवार को आदेश जारी निर्देशित किया हैं कि राजस्व विभाग दल गठित कर क्षेत्र में जाकर पांच दिवस के भीतर निरीक्षण कर रिपोर्ट प्रस्तुत करें। जारी आदेश में बताया गया कि प्रत्येक ग्राम पंचायत स्तर पर सूची बनाकर उसे ग्राम पंचायत में चस्पा किया जाएगा और आपत्ति उपरांत सूची फाइनल करके सहायता राशि मंजूर की जाएगी।


बीते 24 घंटे में जिले में 32.6 मिली मीटर औसत वर्षा दर्ज
अधीक्षक भू-अभिलेख अनूपपुर द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार जिले में बीते 24 घंटे में 32.6 मिली मीटर औसत वर्षा दर्ज की गई। इस दौरान वर्षामापी केन्द्र अनूपपुर में 25 मिली मीटर, कोतमा में 20 मिलीमीटर, बिजुरी में 29.4 मिलीमीटर , जैतहरी में 28 मिली मीटर, वेंकटनगर में 34.7 मिली मीटर, पुष्पराजगढ़ में 32.6 मिली मीटर, अमरकंटक में 67 मिली मीटर तथा बेनीबारी में 24.4 मिली मीटर वर्षा दर्ज की गई।

 

MadhyaBharat 31 October 2025

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