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एस्मा लागू होते ही झुकी सहकारी कर्मचारी यूनियन
ambikapur, Cooperative Employees , ESMA

अंबिकापुर। छत्तीसगढ़ में सहकारी समितियों के कर्मचारियों की लंबी चली हड़ताल आखिरकार सरकार की कड़ी कार्रवाई के बाद समाप्त हो गई। राज्य सरकार द्वारा एस्मा लागू किए जाने के अगले ही दिन आज से प्रबंधक और कंप्यूटर ऑपरेटर दोबारा अपनी ड्यूटी पर लौट आए, जिससे धान खरीद व्यवस्था पटरी पर आने की उम्मीद बढ़ गई है।

 

उल्लेखनीय है कि, कर्मचारी 3 नवंबर से कार्य बहिष्कार पर चले गए थे, जिससे प्रदेशभर में खरीद केंद्रों का संचालन प्रभावित हो रहा था। लगातार जाम पड़ी व्यवस्थाओं को देखते हुए 15 नवंबर को धान खरीद प्रारंभ कराने के लिए सरगुजा प्रशासन को अन्य विभागों के अधिकारियों को समितियों का अस्थायी प्रभारी नियुक्त करना पड़ा। हालांकि इतने प्रयासों के बाद भी 54 खरीद केंद्रों में से केवल कुछ ही केंद्रों पर खरीद शुरू हो पाई थी, जिससे किसानों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा।

 

चार सूत्रीय मांगों के समर्थन में बैठे सहकारी कर्मचारी लगातार धरने पर डटे हुए थे। इन मांगों को लेकर प्रदेशभर के प्रबंधक और कंप्यूटर ऑपरेटरों ने कामकाज पूरी तरह बंद कर दिया था, जिसके चलते कई समितियों में ताले तक लगने की नौबत आ गई थी। स्थिति काबू से बाहर होती देख सरकार ने आंदोलनरत कर्मचारियों पर एस्मा लागू करते हुए तुरंत काम पर लौटने का कड़ा निर्देश जारी किया। कुछ जिलों में आदेश का उल्लंघन करने वाले कर्मचारियों पर एफआईआर तक दर्ज की गई।

 

सरकार की इस सख्ती का असर 21 नवंबर को दिखाई दिया, जब छत्तीसगढ़ सहकारी समिति कर्मचारी संघ ने हड़ताल वापस लेने की घोषणा कर दी। इसके बाद आज शनिवार सुबह से ही कर्मचारी अपनी-अपनी समितियों में पहुंचकर नियमित काम में जुट गए। संघ ने चेतावनी भी दी है कि हड़ताल के दौरान दर्ज एफआईआर, निलंबन, बर्खास्तगी और तबादलों को रद्द किया जाए।

 

सरगुजा जिले में हड़ताल से उपजे हालातों में प्रशासन ने कोई दंडात्मक कदम नहीं उठाया था, इसलिए यहां तेजी से काम सुचारू होने की संभावना है। जिले में इस वर्ष 55,937 किसान पंजीकृत हैं, जिनका कुल धान रकबा लगभग 58,219 हेक्टेयर है। किसानों की सुविधा के लिए ‘तुंहर टोकन’ ऐप का उपयोग फिर से सुचारू हो गया है और ऐप के माध्यम से टोकन जारी होना भी शुरू हो चुका है। ऐसे में 24 नवंबर, सोमवार से सभी 54 केंद्रों में खरीद तेज होने की पूरी उम्मीद है।

 

MadhyaBharat 22 November 2025

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