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मप्र में अमानक पाई गईं 6 आयुर्वेदिक औषधियों के क्रय-विक्रय पर प्रतिबंध
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भोपाल । मध्य प्रदेश में आयुष विभाग द्वारा एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए 6 आयुर्वेदिक औषधियों के क्रय, विक्रय और उपयोग पर तत्काल प्रभाव से प्रतिबंध लगा दिया गया है। ये औषधियां राज्य स्तरीय आयुर्वेद औषधि प्रयोगशाला ग्वालियर की जांच में अमानक पायी गई हैं। संचालनालय आयुष भोपाल के निर्देशन में शुक्रवार को यह कार्यवाही की गई है। ड्रग्स एवं कॉस्मेटिक्स एक्ट, 1940 के नियम 33ईई के तहत इन औषधियों को मानव उपयोग के लिए असुरक्षित माना गया है।


जिला आयुष अधिकारी डॉ. सुलोचना सिंह चौहान ने बतायाकि प्रतिबंधित औषधियों में शर्मायु जैनयुन आयुर्वेद, दतिया (मप्र) द्वारा निर्मित गिलोय सत्व और कामदुधा रस शामिल हैं। इसके अलावा, श्रीधनवंतरी हर्बल ला, सोलन (एचपी) द्वारा निर्मित प्रवाल पिष्टी और मुक्ता शुक्ति पर भी प्रतिबंध लगाया गया है। डाबर इंडिया लि., साहिबाबाद (उप्र) द्वारा निर्मित कफ कुठार रस और लक्ष्मी विलास रस भी अमानक पाए गए हैं। साथ ही इनके क्रय-विक्रय पर रोक लगा दी गई है।


उल्लेखनीय है कि मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा में बीते दिनों जहरीले कोल्ड्रिफ कफ सिरप के सेवन के बाद किड़नी फैल होने से 20 से ज्यादा बच्चों की मौत हो गई थी। इसी बीच जांच में यह आया कि बिछुआ गांव में पांच माह की बच्ची की मौत आयुर्वेदिक दवा पीने से हुई थी। बच्ची के परिजन ने सर्दी-खांसी होने पर आयुर्वेदिक दवा दी थी, जो जांच रिपोर्ट में फेल हो गई। इन दवाओं को अमानक और असुरक्षित मानते हुए छिंदवाड़ा जिले में प्रतिबंधित कर दिया गया। जांच के दौरान सतना में भी यह दवा अमानक पाई गई तो प्रदेश में वे छह दवाएं प्रतिबंधित कर दी गईं, जिनसे बच्ची की मौत हुई थी। जबलपुर में भी इन दवाओं को आयुष विभाग ने प्रतिबंधित करते हुए जांच के लिए टीम गठित की है।


दरअसल, आयुर्वेदिक दवाओं की लैब ग्वालियर में है। वहां जांच में सामने आया कि जिन आयुर्वेदिक दवाओं पर प्रतिबंध लगाया है। संभवत: उसमें डोज का अनुपात बिगड़ा है, इसके साथ ही उनकी पैकिंग में भी गड़बड़ी आई है। सभी दवाओं को फिलहाल प्रदेश भर की दुकानों से अलग कर दिया गया है। आयुष विभाग ने सभी जिले के अधिकारियों को जांच करते हुए सैंपलिंग करने के बाद दवाओं को जब्त करने को कहा है।


जिला आयुष अधिकारी डॉ. सुरत्ना सिंह चौहान ने बताया कि राज्य सरकार के निर्देश पर जबलपुर में जांच शुरू करते हुए दवाओं को बरामद किया जा रहा है। यह काम डॉक्टरों की टीम को दिया गया है। हालांकि, जिले की अधिकतर दुकान संचालकों ने इन बैच नंबर की दवाओं को अलग कर दिया है। जिला आयुष अधिकारी का कहना है कि टीम लगातार हर दुकान में जांच भी कर रही है, अगर कोई प्रतिबंधित दवाओं को बेचते मिलता है तो उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
MadhyaBharat 22 November 2025

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