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रेयर अर्थ मैग्नेट के उत्पाद को बढ़ावा देने की योजना को मंजूरी
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नई दिल्ली । केंद्र सरकार ने आज 7280 करोड़ रुपये के वित्तीय खर्च के साथ सिंटर्ड रेयर अर्थ परमानेंट मैग्नेट (आरईपीएमएस) के उत्पादन को बढ़ावा देने की योजना को बुधवार को मंजूरी दी। आरईपीएमएस सबसे मज़बूत तरह के परमानेंट मैग्नेट में से एक है और इलेक्ट्रिक गाड़ियों, रिन्यूएबल एनर्जी, इलेक्ट्रॉनिक्स, एयरोस्पेस और डिफेंस एप्लीकेशन के लिए बहुत ज़रूरी है।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट की बैठक में योजना को मंजूरी प्रदान की गयी। सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्वनी वैष्णव ने राष्ट्रीय मीडिया केंद्र में आयोजित पत्रकार वार्ता में कैबिनेट के फैसलों की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि इलेक्ट्रिक गाड़ियों, रिन्यूएबल एनर्जी, इंडस्ट्रियल एप्लीकेशन और कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स की तेज़ी से बढ़ती डिमांड की वजह से भारत में आरईपीएमएस का उपयोग 2025 से 2030 तक दोगुना होने की उम्मीद है। अपनी तरह की इस पहली पहल का मकसद भारत में 6,000 मीट्रिक टन प्रति वर्ष इंटीग्रेटेड रेयर अर्थ परमानेंट मैग्नेट (आरईपीएम) मैन्युफैक्चरिंग शुरू करना है। इससे आत्मनिर्भरता बढ़ेगी और भारत ग्लोबल आरईपीएम बाजार में एक अहम खिलाड़ी के तौर पर अपनी जगह बनाएगा। 

वैष्णव ने बताया कि यह योजना इंटीग्रेटेड आरईपीएमएस उत्पादन फैसिलिटी बनाने में मदद करेगी, जिसमें रेयर अर्थ ऑक्साइड को मेटल में, मेटल को एलॉय में और एलॉय को फिनिश्ड आरईपीएमएस में बदलना शामिल है। भारत में आरईपीएमएस की डिमांड मुख्य रूप से इम्पोर्ट से पूरी होती है। इस पहल से भारत अपनी पहली इंटीग्रेटेड आरईपीएम मैन्युफैक्चरिंग फैसिलिटी बनाएगा, जिससे रोज़गार पैदा होगा, आत्मनिर्भरता मज़बूत होगी और 2070 तक नेट ज़ीरो हासिल करने के देश की प्रतिबद्धता को आगे बढ़ाया जाएगा। इस योजना का कुल वित्तीय खर्च 7280 करोड़ रुपये है, जिसमें पांच सालों के लिए आरईपीएम की बिक्री पर 6450 करोड़ रुपये का सेल्स-लिंक्ड इंसेंटिव और कुल 6,000 मीट्रिक टन प्रतिवर्ष आरईपीएम मैन्युफैक्चरिंग फैसिलिटी बनाने के लिए 750 करोड़ रुपये की कैपिटल सब्सिडी शामिल है। 

इस योजना में ग्लोबल कॉम्पिटिटिव बिडिंग प्रोसेस के ज़रिए पांच लाभार्थी को कुल क्षमता देने का लक्ष्य है। हर लाभार्थी को 1,200 मीट्रिक टन प्रतिवर्ष तक की क्षमता दी जाएगी। योजना का कुल समय अवार्ड की तारीख से 7 साल होगा, जिसमें एक इंटीग्रेटेड आरईपीएम मैन्युफैक्चरिंग फैसिलिटी सेट अप करने के लिए 2 साल का जेस्टेशन पीरियड और आरईपीएम की बिक्री पर इंसेंटिव देने के लिए 5 साल शामिल हैं।

MadhyaBharat 26 November 2025

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