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सर्वदलीय बैठक में सरकार ने विपक्ष से की सहयोग की अपील
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नई दिल्ली । सरकार ने सोमवार से शुरू हो रहे संसद के शीतकालीन सत्र से एक दिन पहले हुई सर्वदलीय बैठक को सौहार्दपूर्ण बताते हुए उम्मीद जतायी है कि सत्र के सुचारू संचालन में सभी दलों का सहयोग मिलेगा। बैठक में विपक्षी नेताओं ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) का मुद्दा उठाया। इसके अलावा विपक्ष ने सुरक्षा, लोकतंत्र और क्षेत्रीय मुद्दों पर भी अपनी बात रखी। सरकार ने विपक्ष से सहयोग की अपील करते हुए आश्वासन दिया कि सरकार विपक्ष की ओर से उठाए जा रहे सभी मुद्दों पर विचार करेगी।

 

रक्षामंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में रविवार को संसद भवन के संसदीय सौध में आयोजित बैठक में संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू, राज्यसभा में नेता सदन जेपी नड्डा, संसदीय कार्य राज्यमंत्री अर्जुनराम मेघवाल, लोकसभा में कांग्रेस के उपनेता गौरव गोगोई सहित विभिन्न पार्टियों के फ्लोर लीडर ने भाग लिया।


संसदीय कार्य मंत्री रिजिजू ने बैठक के बाद पत्रकारों से कहा कि इस सत्र के दौरान विधायी और अन्य कामकाज को मिलाकर 14 मदों की पहचान की गई है। उन्होंने कहा कि सरकार दोनों सदनों के नियमों के अनुसार सदनों के पटल पर किसी भी अन्य महत्वपूर्ण मुद्दे पर चर्चा करने के लिए तैयार है। 

 

रिजिजू ने कहा कि बैठक सोहार्दपूर्ण महौल में सम्पन्न हुई। विपक्ष ने अपनी ओर से कई मुद्दे उठाए और सुझाव रखे। इन पर चर्चा के बाद आज शाम होने वाली कार्य मंत्रणा समिति की बैठक में इन्हें रखा जाएगा। वे सरकार की ओर से आश्वासन देते हैं कि हम विपक्ष के साथ सभी मुद्दों पर बातचीत करेंगे और उनसे अपेक्षा करते हैं कि संसद को सुचारू ढंग से संचालित करने में वे सहयोग करेंगे।


एसआईआर के मुद्दे पर रिजिजू ने कहा कि वे इस समय इस पर कुछ नहीं कहेंगे। शाम को कार्यमंत्रणा समिति की बैठक होगी जिसमें कुछ मुद्दों पर सहमति बन सकती और कुछ मुद्दे चेयर के समक्ष उनकी अनुमति के लिए भेजे जाएंगे। उन्होंने कहा कि विपक्ष एसआईआर के मुद्दे पर संसद नहीं चलने देगा ऐसा कोई विषय बैठक में नहीं आया है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में गतिरोध संभव है और अगल-अलग एजेंडा होने के कारण मतभेद भी संभव हैं लेकिन हम विपक्ष से अनुरोध करते हैं कि वे सदन को सुचारू रूप से चलाने में सहयोग करेंगे।


बैठक में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने नेताओं को सूचित किया कि संसद का शीतकालीन सत्र सोमवार, एक दिसंबर से शुरू होगा और सरकारी कामकाज की तात्कालिकता के अधीन सत्र शुक्रवार, 19 दिसंबर को समाप्त हो सकता है। सत्र में कुल 19 दिनों की अवधि में 15 बैठकें होंगी।


संसद के शीतकालीन सत्र के दौरान संभावित रूप से विचार किए जाने वाले विधेयक इस प्रकार हैं- जन विश्वास (प्रावधानों का संशोधन) विधेयक, दिवाला और दिवालियापन संहिता (संशोधन) विधेयक, मणिपुर और सेवा कर (दूसरा संशोधन) विधेयक, एक अध्यादेश को बदलने के लिए निरसन और संशोधन विधेयक, राष्ट्रीय राजमार्ग (संशोधन) विधेयक, परमाणु ऊर्जा विधेयक, कॉर्पोरेट कानून (संशोधन) विधेयक, प्रतिभूति बाजार संहिता विधेयक (एसएमसी), बीमा कानून (संशोधन) विधेयक, मध्यस्थता और सुलह (संशोधन) विधेयक, भारतीय उच्च शिक्षा आयोग विधेयक, केंद्रीय उत्पाद शुल्क (संशोधन) विधेयक, स्वास्थ्य सुरक्षा से राष्ट्रीय सुरक्षा उपकर विधेयक।


इसके अलावा कुछ वित्तीय कार्य भी हैं, वे इस प्रकार हैं- वर्ष 2025-26 के लिए अनुदान की पूरक मांगों के पहले बैच पर प्रस्तुति, चर्चा और मतदान और संबंधित विनियोग विधेयक की शुरुआत, विचार और पारित/वापसी।


विपक्ष का रहा एसआईआर पर फोकस

विपक्षी दलों ने आज सर्वदलीय बैठक में विशेष रूप से एसआईआर का मुद्दा उठाया। कुछ विपक्षी नेताओं ने इसे संसद में उठाने और सरकार पर दवाब बनाने के लिए मुद्दा बनाने की बात की। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के नेतृत्व में विपक्षी दल कल बैठक करेंगे और आगे की रणनीति तय की जाएगी।


लोकसभा में कांग्रेस के उपनेता गौरव गोगोई ने पत्रकारों से बातचीत के दौरान शीतकालीन सत्र के छोटा होने पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि इस सत्र में केवल 15 बैठकें होंगी। यह शायद अब तक का सबसे छोटा सत्र होगा। इससे सरकार की गंभीरता का पता चलता है। सत्र को आयोजित करने में भी अनावश्यक देरी की गई है। इससे प्रतीत होता है कि लोकतंत्र और संसदीय मर्यादा को समाप्त करने की कोशिश की जा रही है।


उन्होंने बताया कि बैठक में विपक्ष ने सुरक्षा का मुद्दा उठाया। दिल्ली में हुए बम विस्फोट कानून व्यवस्था की विफलता का उदाहरण है। सरकार इस पर छोटी भी चर्चा करने को तैयार नहीं है। इसके अलावा वायु प्रदूषण, किसान और मजदूरों की आमदनी, प्राकृतिक आपदाएं भी चुनौतियां बनी हुई हैं और सरकार इसके लिए कुछ नहीं कर रही।


राज्यसभा में कांग्रेस के उपनेता प्रमोद तिवारी ने एसआईआर का मुद्दा उठाया और कहा कि सरकार बड़ी जल्दबाजी में एसआईआर की प्रक्रिया संचालित कर रही है। आज इसकी तारीखों को एक सप्ताह आगे बढ़ाया गया है। हमें लगता है कि कोई मतदाता सूची से छूटे नहीं इसके लिए इसमें और अधिक समय लिया जाना चाहिए।


तृणमूल सांसद कल्याण बनर्जी ने कहा कि विपक्ष की ओर से कई मुद्दे उठाए गए। हमने मांग की कि विशेषकर एसआईआर पर संसद में विस्तृत बहस होनी चाहिए। एसआईआर प्रक्रिया का उपयोग मतदाता सूची से नाम हटाने के लिए नहीं होना चाहिए। उन्होंने दावा किया कि कलकत्ता हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के बावजूद केंद्र सरकार ने पश्चिम बंगाल को मनरेगा का धन जारी नहीं किया। साथ ही गृह मंत्रालय की लापरवाही के कारण राष्ट्रीय सुरक्षा पर असर पड़ा है, जिस पर गंभीर चर्चा जरूरी है।


समाजवादी पार्टी के महासचिव रामगोपाल यादव ने कहा कि उनकी पार्टी ने एसआईआर का मुद्दा उठाया और कहा कि चुनावकर्मी दवाब में आत्महत्या कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि हमारी मांग है कि इसकी समय सीमा बढ़ाई जाए नहीं तो हम सदन को चलने नहीं देंगे।

MadhyaBharat 30 November 2025

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