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सुप्रीम कोर्ट ने कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया को नोटिस जारी करते हुए 2023 में वरुणा सीट से उनकी जीत को चुनौती देने वाली याचिका पर जवाब मांगा है। जस्टिस विक्रम नाथ की बेंच ने यह नोटिस उस याचिका पर जारी किया है, जिसमें आरोप लगाया गया है कि चुनाव से पहले किए गए फ्रीबीज के वादे भ्रष्ट आचरण की श्रेणी में आते हैं। शुरुआत में अदालत इस याचिका को सुनने के पक्ष में नहीं थी, लेकिन यह बताने पर कि फ्रीबीज से जुड़े बड़े मुद्दे पर फैसला तीन जजों की बेंच में लंबित है, अदालत ने नोटिस जारी करने का निर्णय लिया। सुनवाई के दौरान जस्टिस नाथ ने पूछा कि क्या चुनावी घोषणापत्र जारी करना भ्रष्ट आचरण माना जा सकता है।
याचिकाकर्ता का आरोप है कि महिलाओं को मुफ्त बस यात्रा जैसी योजनाएँ—जैसे शक्ति योजना—अनुच्छेद 14 का उल्लंघन करती हैं और पुरुषों के साथ भेदभाव करती हैं। उन्होंने सिद्धारमैया का चुनाव अमान्य घोषित करने और उन्हें छह साल तक चुनाव लड़ने से प्रतिबंधित करने की मांग की है। इससे पहले कर्नाटक हाई कोर्ट इस याचिका को खारिज कर चुका था, जिसके बाद मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा। कांग्रेस के घोषणापत्र में पांच बड़ी गारंटियां—गृह ज्योति, गृह लक्ष्मी, अन्न भाग्य, युवा निधि और शक्ति योजना—घोषित की गई थीं, जिनके आधार पर चुनाव में अनियमितता का आरोप लगाया गया है।
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