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संसद में वंदे मातरम् को लेकर जोरदार बहस
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संसद का मानसून सत्र इस समय चल रहा है, और इसी दौरान भारत के राष्ट्रीय गीत 'वंदे मातरम्' के 150 साल पूरे होने पर संसद में विशेष चर्चा हो रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस अवसर पर वंदे मातरम् की गौरव यात्रा को याद करते हुए कहा कि यह गीत अंग्रेजों की साजिश के खिलाफ गाया गया और स्वतंत्रता संग्राम में भावनात्मक नेतृत्व प्रदान किया। पीएम मोदी ने लोकसभा में बताया कि वंदे मातरम् के जयघोष ने 1947 में देश को आजादी दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनका कहना था कि इस विषय पर चर्चा करते समय कोई पक्ष या विपक्ष नहीं है, बल्कि यह सभी सांसदों के लिए देशभक्ति का एक अवसर है।

 

राज्यसभा में हंगामा और विपक्ष का पलटवार

 

वहीं, राज्यसभा में भी वंदे मातरम् पर चर्चा के दौरान कई मुद्दे उठे और हंगामा देखने को मिला। विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने दलितों के अधिकार और देश की विदेश नीति को लेकर सवाल उठाए। उनका आरोप था कि पीएम मोदी और सरकार देश की आजादी में योगदान देने वाले महापुरुषों का सम्मान नहीं कर रहे। इस पर केंद्रीय गृह मंत्री जेपी नड्डा और अमित शाह ने खड़गे को टोका और कहा कि वंदे मातरम् पर चर्चा के दौरान अन्य मुद्दों को उठाना उचित नहीं है। अमित शाह ने यह भी कहा कि कांग्रेस के कुछ सांसद वंदे मातरम् गाने का विरोध कर चुके हैं, और इसकी लिस्ट सदन में दर्ज की जाएगी।

 

वंदे मातरम् का ऐतिहासिक महत्व और राष्ट्रीय गौरव

 

संसद में इस बहस के दौरान यह भी याद दिलाया गया कि बंकिम चंद्र चट्टर्जी ने 7 नवंबर 1875 को वंदे मातरम् लिखा था और इसे राष्ट्रगीत का दर्जा प्राप्त हुआ। अमित शाह ने बताया कि महापुरुषों जैसे श्यामजी कृष्ण वर्मा, भीखाजी कामा और वीर सावरकर ने भारतीय त्रिवर्ण ध्वज पर स्वर्ण अक्षरों में वंदे मातरम् का नाम लिखा। उन्होंने कहा कि वंदे मातरम् ने आजादी की लड़ाई को गति दी और भारतीय जनता पार्टी के सभी सदस्य सम्मान के साथ इसके गान के समय खड़े रहते हैं। पीएम मोदी और केंद्रीय नेता इस गीत को राष्ट्र की शुद्धतम आत्मा से जुड़ा मानते हैं और इसे हर अवसर पर याद करने की आवश्यकता बताते हैं।

Vandana singh 9 December 2025

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