Since: 23-09-2009

  Latest News :
भारतीय सेना प्रमुख ने दी साफ चेतावनी.   अहमदाबाद में जर्मन चांसलर मर्ज का भव्य स्वागत.   संविधान निर्माण में दरभंगा राज का योगदान.   राज ठाकरे बोले- यूपी-बिहार वाले महाराष्ट्र में हिंदी न थोपें.   मोदी–जर्मन चांसलर के बीच द्विपक्षीय वार्ता.   इसरो का PSLV-C62 रॉकेट रास्ते से भटका, मिशन फेल.   इंदौर में दूषित पानी से मौतों का सिलसिला जारी.   मप्र हाईकोर्ट में लाइव स्ट्रीमिंग के दुरुपयोग पर याचिका.   CM डॉ. यादव आज करेंगे खेलो एमपी यूथ गेम्स का शुभारंभ.   MP में निगम-मंडलों के अध्यक्ष नियुक्ति के करीब.   MP में किसानों के लिए ‘कल्याण’ योजना का विस्तार.   इंदौर गौशाला में 20 गायों की मौत.   छत्तीसगढ़ में राष्ट्रीय युवा दिवस पर युवा रत्न सम्मान.   CGPSC भर्ती घोटाले में बड़ा खुलासा.   रायपुर में डेयरी संचालक पर 10,000 रुपये का जुर्माना.   CM साय के जनदर्शन में 1950 आवेदन, कांग्रेस ने उठाए सवाल.   मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने \'आदि लोकोत्सव\' में प्रतिभागियों को दी शुभकामनाएं.   छत्तीसगढ़ में अपार-आईडी में अग्रणी प्रगति, देश के बड़े राज्यों में शीर्ष पर.  
छत्तीसगढ़ की प्रसिद्ध शिल्पकार मती हीराबाई झरेका बघेल को राष्ट्रपति ने राष्ट्रीय हस्तशिल्प पुरस्कार से नवाजा,
Chhattisgarh,famous craftsman ,Mati Hirabai, Jhareka Baghel, , National Handicraft Award ,President

छत्तीसगढ़ की पारंपरिक धातुकला और ढोकरा–बेलमेटल शिल्प को नई पहचान दिलाने वाली सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले की प्रसिद्ध शिल्पकार मती हीराबाई झरेका बघेल को नई दिल्ली स्थित विज्ञान भवन में आयोजित समारोह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु द्वारा राष्ट्रीय हस्तशिल्प पुरस्कार से सम्मानित किया गया। इस गौरवपूर्ण अवसर पर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने उन्हें प्रदेशवासियों की ओर से बधाई दी और कहा कि यह उपलब्धि केवल मती हीराबाई का नहीं, बल्कि पूरे छत्तीसगढ़ के शिल्पकारों का सम्मान है।

 

छत्तीसगढ़ की कला और ग्रामीण प्रतिभाओं को नई पहचान

 

मुख्यमंत्री साय ने बताया कि मती बघेल जैसी शिल्पकार ग्राम पंचायत बैगीनडीह जैसे वनांचल क्षेत्र से निकलकर अपनी विशिष्ट कला के माध्यम से देशभर में छत्तीसगढ़ की पहचान को नई ऊँचाइयाँ दे रही हैं। यह ढोकरा कला सदियों पुरानी धरोहर है, और मती बघेल जैसी कलाकार इस परंपरा को आधुनिक समय के अनुरूप जीवंत बनाए रखती हैं। राज्य सरकार कला-संरक्षण, प्रशिक्षण, कौशल उन्नयन और बाजार विस्तार के लिए लगातार काम कर रही है, ताकि ग्रामीण और वनवासी क्षेत्रों की प्रतिभाएं लाभान्वित हों और अपनी कला से राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंच पर पहचान बना सकें।

Vandana singh 10 December 2025

Comments

Be First To Comment....
Video

Page Views

  • Last day : 8641
  • Last 7 days : 45219
  • Last 30 days : 64212


x
This website is using cookies. More info. Accept
All Rights Reserved ©2026 MadhyaBharat News.