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केंद्र सरकार ने गुरुवार को राज्यसभा में बताया कि देशभर की अदालतों में कुल 5.49 करोड़ से अधिक मामले लंबित हैं। कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने कहा कि यह आंकड़ा सुप्रीम कोर्ट से लेकर निचली अदालतों तक लगातार बढ़ रहा है। ताज़ा सरकारी डेटा के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट में 90,897 केस, 25 हाईकोर्ट में 63,63,406 केस और निचली अदालतों में 4,84,57,343 केस पेंडिंग हैं। सरकार ने माना कि मामलों की जटिलता, गवाहों व एजेंसियों का सहयोग न मिलना, और अदालतों में ढांचे व स्टाफ की कमी जैसे कारण बैकलॉग को बढ़ाते हैं।
CJI सूर्यकांत ने भी केस पेंडेंसी को न्यायपालिका की सबसे बड़ी चुनौती बताया है। 22 नवंबर को दिए बयान में उन्होंने कहा था कि सुप्रीम कोर्ट में पेंडिंग केस 90 हजार से ज्यादा हो चुके हैं और इन्हें कम करना उनकी पहली प्राथमिकता होगी। उन्होंने मीडिएशन को विवाद निपटाने का प्रभावी तरीका बताते हुए कहा कि यह न्याय व्यवस्था के लिए 'गेम चेंजर' साबित हो सकता है। वे देशभर के हाई कोर्ट और ट्रायल कोर्ट से विस्तृत पेंडेंसी रिपोर्ट भी मांगने की तैयारी कर रहे हैं।
जस्टिस सूर्यकांत 24 नवंबर को देश के 53वें CJI के रूप में शपथ लेंगे। उन्होंने कहा कि अत्यधिक मौसम के बीच भी वे अपनी स्वास्थ्य दिनचर्या नहीं छोड़ते। साथ ही उन्होंने AI पर सावधानी बरतने की सलाह देते हुए कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस न्यायिक संस्थानों के लिए महत्वपूर्ण समाधान दे सकता है, लेकिन इसके जोखिमों को समझकर ही इसका इस्तेमाल बढ़ाया जाना चाहिए।
Patrakar Priyanshi Chaturvedi
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