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सिंहस्थ लैंड पुलिंग योजना को लेकर किसानों और सरकार के बीच विवाद गहरा गया है। किसान संघ का आरोप है कि पिछले एक साल से अधिक समय से चल रहे आंदोलन और सरकार के साथ हुई वार्ता के बावजूद योजना का निरस्त आदेश नहीं दिया गया। पिछली बैठक के बाद दोनों पक्षों ने योजना निरस्त करने का समझौता किया था, और किसानों ने इसके दूसरे दिन धन्यवाद यात्रा भी निकाली थी। मुख्यमंत्री ने किसानों के सम्मान में योजना निरस्त करने की घोषणा की थी, लेकिन 19 नवंबर को निरस्त आदेश की जगह संशोधन जारी कर दिया गया। इस पर किसान संघ में गुस्सा और बढ़ गया और उन्होंने दो दिन में सीधे तौर पर निरस्त आदेश की मांग की। जब सरकार ने इसका ध्यान नहीं दिया तो संघ ने 7 दिन का समय देते हुए आदेश जारी करने की मांग की और इस समय सीमा के बाद प्रदेशव्यापी आंदोलन की चेतावनी दी। 10 दिसंबर तक भी सरकार की ओर से कोई कार्रवाई नहीं होने पर किसानों का आक्रोश और गहरा गया। प्रांत के 18 जिलों से लगभग 165 प्रतिनिधि उज्जैन में बैठक के लिए पहुंचे, जिसमें प्रांताध्यक्ष लक्ष्मीनारायण पटेल, प्रदेशाध्यक्ष कमल सिंह आंजना, महामंत्री रमेश दांगी, मंत्री धरम पटेल, मंत्री भारतसिंह बैस सहित सभी जिला और तहसील अध्यक्ष मौजूद थे।
किसानों का संघर्ष और आगामी आंदोलन
सिंहस्थ क्षेत्र के 17 गांवों की करीब 2,378 हेक्टेयर यानी लगभग 12 हजार बीघा जमीन लैंड पुलिंग योजना के तहत अधिग्रहण की प्रक्रिया में थी, जिसमें लगभग 1,896 किसानों की जमीन शामिल थी। किसानों का आरोप है कि आपत्ति की सुनवाई में उन्हें दरकिनार किया गया और अनेक बहाने बनाकर उनकी मांगों को नजरअंदाज किया गया। इस बार आंदोलन में किसान परिवार के साथ-साथ गाय और भैंस भी शामिल होंगे, जिन्हें वही रखा जाएगा और उनका चारा व गौबर भी मौजूद रहेगा। प्रांत के 18 जिलों के 115 तहसीलों से किसान प्रतिनिधि और किसान इस आंदोलन में शामिल होंगे। किसानों ने अपनी जमीनों और खेतों पर भाकिसं के झंडे लहराकर विरोध जताया है। किसान संघ ने साफ किया है कि जब तक निरस्त आदेश नहीं आता, कोई बातचीत नहीं होगी और आंदोलन जारी रहेगा। इस आंदोलन में किसानों की भावना और उनका संघर्ष साफ झलकता है।
Patrakar Vandana singh
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