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प्रधानमंत्री अन्नदाता आय संरक्षण अभियान (पीएम आशा) के तहत छत्तीसगढ़ को दलहन और तिलहन फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर उपार्जन की अनुमति मिल गई है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की पहल पर 20 दिसंबर को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान और प्रदेश के कृषि मंत्री रामविचार नेताम के बीच हुई चर्चा के बाद केंद्र सरकार ने खरीफ सीजन के लिए 425 करोड़ रुपए की स्वीकृति दी। केंद्र सरकार ने अरहर, उड़द, मूंग, सोयाबीन और मूंगफली के उपार्जन की अनुमति दी है, जिसमें अरहर 21,330 मीट्रिक टन, उड़द 25,530 मीट्रिक टन, मूंग 240 मीट्रिक टन, सोयाबीन 4,210 मीट्रिक टन और मूंगफली 4,210 मीट्रिक टन शामिल हैं। इस पर कुल 425 करोड़ रुपए खर्च होंगे और भारत सरकार ने वर्ष 2025-26 के लिए अरहर का MSP 8,000 रुपए, मूंग 8,768 रुपए, उड़द 7,800 रुपए, मूंगफली 7,800 रुपए और सोयाबीन 5,328 रुपए प्रति क्विंटल घोषित किया है।छत्तीसगढ़ सरकार ने MSP पर खरीद के लिए व्यापक व्यवस्थाएं भी की हैं। उपार्जन राज्य में मार्कफेड और सहकारी समितियों के माध्यम से 22 जिलों में 222 उपार्जन केंद्रों पर किया जाएगा। किसानों का पंजीकरण कृषि विभाग के एकीकृत किसान पोर्टल पर लगातार जारी है और जो किसान अब तक पंजीकृत नहीं हुए हैं, वे नजदीकी सहकारी समिति के माध्यम से लाभ उठा सकते हैं। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि यह कदम किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य दिलाने के साथ-साथ उनकी आय बढ़ाने में सहायक होगा। इस पहल से प्रदेश में फसल विविधीकरण को बढ़ावा मिलेगा और छत्तीसगढ़ दाल एवं खाद्य तेल के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ेगा।
Patrakar Vandana singh
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