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सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार, 29 दिसंबर 2025 को अरावली हिल्स और रेंज की परिभाषा से जुड़े मामले की सुनवाई करते हुए पुराने आदेश पर फिलहाल रोक लगा दी। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा कि यह देखा जाना आवश्यक है कि क्या 500 मीटर के अंतराल (गैप्स) में नियंत्रित खनन की अनुमति दी जा सकती है और यदि दी जाती है, तो पारिस्थितिक संतुलन बनाए रखने के लिए कौन-से सटीक संरचनात्मक मानक अपनाए जाएंगे। सुप्रीम कोर्ट ने अरावली क्षेत्र में नई खनन लीज देने पर पहले ही रोक लगा रखी थी और अब इस फैसले पर फिलहाल रोक लगाते हुए 21 जनवरी के लिए अगली सुनवाई तय की है।
उच्च-स्तरीय विशेषज्ञ समिति और संरक्षण प्रयास
सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि विशेषज्ञ समिति के गठन से पहले यह तय करना होगा कि समिति किन-किन क्षेत्रों की जांच करेगी। समिति अरावली क्षेत्र की पारिस्थितिक अखंडता बनाए रखने के लिए विस्तृत अध्ययन करेगी और यह भी देखेगी कि 12,081 पहाड़ियों में से 1,048 का 100 मीटर ऊंचाई मानदंड वैज्ञानिक और तथ्यात्मक रूप से सही है या नहीं। पूर्व वन संरक्षण अधिकारी आर.पी. बलवान ने याचिका में कहा कि यह ऊंचाई पैमाना अरावली श्रृंखला के संरक्षण के प्रयासों को कमजोर करेगा। पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने भी कहा कि जब तक टिकाऊ खनन के लिए प्रबंधन योजना तैयार नहीं हो जाती, तब तक कोई नया खनन पट्टा नहीं दिया जाएगा। यह पहाड़ श्रृंखला गुजरात से दिल्ली तक फैली है और थार रेगिस्तान व उत्तरी मैदानों के बीच एक महत्वपूर्ण पारिस्थितिक दीवार का काम करती है।
Patrakar Vandana singh
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